जीबी पंत पर्यावरण संस्थान में प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंचासीन संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल औ?
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अल्मोड़ा। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल के ग्रामीण तकनीकी परिसर प्रशिक्षण केंद्र में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को पिरूल से जैविक ईंधन बायोब्रिकेट (कोयला) बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। उद्घाटन करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल ने कहा कि प्रशिक्षण से व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ती है। समूह के किसान बायोब्रिकेट बनाने की सीखी गयी तकनीक को दैनिक जीवन में अपनाएं।
उन्होंने कहा कि किसान उत्पाद की समूह के माध्यम से बिक्री कर आजीविका सुधारें। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जीसीएस नेगी ने कहा कि बायोब्रिकेट के उपयोग से ईंधन के लिए जंगलों पर निर्भरता कम होगी। प्रसार प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य केके पंत, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अंजू, प्रशिक्षण प्रभारी आनंद भट्ट ने भी विचार रखे। डॉ. हर्षित पंत ने संचालन किया।
डॉ. पंत और डीएस बिष्ट ने पिरूल से तैयार चारकोल को सांचे में ढालकर बायोब्रिकेट बनाने का प्रशिक्षण दिया। किसानों को संस्थान के ग्रामीण तकनीकी परिसर का भ्रमण भी कराया गया। डॉ. देवेंद्र चौहान ने पिरुल से मोटा कागज तैयार कर फाइल कबर, मीटिंग फोल्डर, कैरी बैग, नोट पैड आदि बनाने की जानकारी दी। प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिए गए। साथ ही समूहों को बायोब्रिकेट बनाने का सांचा और प्रत्येक किसान को एक-एक अंगीठी भी दी गई। छह दिवसीय प्रशिक्षण में हिमालयी आजीविका सुधार परियोजना की ओर से हवालबाग विकासखंड में गठित 15 एसएचजी से जुड़ीं 144 महिलाओं और छह पुरुषों ने भाग लिया।