जंगलों की आग नियंत्रण में नहीं आ रही है। अब वन्य जीव विहार (अभ्यारण्य) बिनसर के जंगल में भी आग भड़क गई है। वन कर्मी आग बुझाने में लगे हैं, लेकिन आग काबू में नहीं आ रही है। इसके अलावा सोमेश्वर रेंज के अंतर्गत कई जंगल भी धधक रहे हैं। आग लगने से वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। पूरे क्षेत्र में धुएं की धुंध छाई हुई है।
बिंसर अभ्यारण्य के गोनाप के जंगल में बीती शाम आग भड़क गई। इसे तो वन कर्मियों ने किसी तरह काबू में कर लिया, लेकिन अब दक्षिणी बिंसर के कंपार्टमेंट नंबर 30 में आग लग गई। अभ्यारण्य में काफी बड़े क्षेत्र में आग लगी हुई है। आग से छोटे पेड़ पौधों और वनस्पतियों को काफी नुकसान पहुंचा है। यदि जल्द आग पर काबू नहीं पाया गया तो वन्य जीवों को भी खतरा हो सकता है। रेंजर केवलानंद पांडे ने बताया कि आग बुझाने में वन कर्मी जुटे हैं।
नगर में मंगलवार रात मालरोड में लिंक रोड तिराहे पर बारातियों द्वारा पटाखे छोड़ने से जीजीआईसी परिसर में आग लग गई। रात को मौके पर फायर ब्रिगेड वाहन को बुलाया गया। समय रहते फायर कर्मियों ने आग बुझा दी अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
उधर, सोमेश्वर रेंज के अंतर्गत अधूरिया, झुपुलचौरा, बले, माला, सर्प, बैगनियां, मनाना, सिरकोट भटकटो, जयंती देवी, खीराकोट आदि के जंगलों में भी आग लगी हुई है। सिरकोट में तो गांव आबादी क्षेत्र में पहुंच गई थी, जिसे ग्रामीणों ने बुझाया। सोमेश्वर क्षेत्र में धुएं की धुंध इतनी गहरी है कि सूरज की रोशनी भी नहीं पहुंच पा रही है।
वहीं, भिकियासैंण क्षेत्र के जंगल भी धधक रहे हैं। धुएं से रामगंगा, गगास, नौरड़, विनोद घाटियों में आग से वन संपदा का नुकसान हो रहा है। हालात यह है कि दोपहर तक धुएं की धुंध से वातावरण में कोहरे जैसा नजारा है। जंगलों में लगी आग से मवेशियों के लिए चारे का संकट भी होने लगा है। वहीं, तपिश से जल स्रोत भी सूखने लगे हैं। पर्यावरण प्रदूषित होने से बीमारियां होने की आशंका है। अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता आनंद नेगी ने कहा है सरकारी तंत्र गोष्ठियों के माध्यम से जंगलों को बचाने के दावे करता है, लेकिन धरातल पर कार्य नहीं होता है।
धुएं से लोगों की दिक्कतें बढ़ी
सोमेश्वर। धुंध छाने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सोमेश्वर अस्पताल के डॉक्टर सुरेश चंद्र पाठक ने सलाह दी है कि आंखों में जलन होने पर दिन में चार से पांच बार ठंडे पानी से आंखों को धोएं। सांस और दमा के रोगी नाक में रुमाल बांधें।