पाली पछाऊं के एतिहासिक स्याल्दे बिखौती के मुख्य मेले में आल और गरख समूहों को मिलाकर कुल 18 जोड़ा नगाड़े, निशाणों के साथ पहुंचे लोगों ने ओड़ा भेंटा। बारिश की फुहारों में भीगते पहुंचे लोगों के उत्साह में कमी नहीं थी।
सोमवार को सुरभि, नंदिनी नदियों के संगम स्थल विभांडेश्वर से शुरू हुए स्याल्दे बिखौती का मुख्य मेला बुधवार को पूरे चरम पर पहुंच गया। हालांकि बारिश की फुहारों ने मेले की रंगत बदल कर रख दी लेकिन विभिन्न समूहों में शामिल होकर ओड़ा भेंटने पहुंचे लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी।
निशाणों, नगाड़े की गूंज, नरसिंग की गगनभेदी विजय धुन के साथ हाथों में छाता पकडे़ झोड़ा गाते पहुंचे लोगों में गजब का जोश था। परंपरा के अनुसार इस बार आल समूह ने पहले ओड़ा भेंटा। आल समूह में बिजेपुर, भौंरा, मल्ली मिरई, तल्ली मिरई, किरौली, डढूली सहित कुल छह गांवों के नगाड़े शामिल थे। आल के बाद गरख समूह के लोगों ने ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई।
गरख समूह में धन्यारी, असगोली, कूना, सलना, बेढुली, बनोली, सिमलगांव, खलना, बसेरा, बूंगा, छतगुल्ला, कुई गांव के कुल 12 जोड़े शामिल थे। कई किलोमीटर पैदल चलकर ओड़ा भेंटने पहुंचे लोगों में कुछ छाता ताने थे, जबकि अधिकांश बगैर छाता लगाए भीगते हुए पहुंचे। इस मौके पर संसदीय सचिव विधायक मदन सिंह बिष्ट, मेला समिति अध्यक्ष विमला साह आदि मौजूद थे।