हवालबाग विकासखंड का दाड़िमखोला गांव
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यहां हर वो सुविधा है, जिसकी पहाड़ के हर गांव को चाहत हो सकती है। भरपूर पानी, सड़क, खूब फैले खेत, बिजली से लेकर सरकारी योजनाओं की भरमार। इसके बाद भी अल्मोड़ा के हवालबाग विकासखंड के गांव दाड़िमखोला से पिछले 15 साल में 50 परिवार पलायन कर चुके हैं।
पहाड़ के गांवों का जिक्र आता है तो अभाव और सुविधाओं की कमी की बात की जाती है। कहा जाता है कि पलायन की समस्या का समाधान भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर और असुविधाओं को दूर करके किया जा सकता है।
आईएचकैप और सीएमस की कार्यशाला के दूसरे दिन इस गांव में पहुंचे प्रतिभागियों को पलायन की इस समस्या का सामना भी करना पड़ा है। इस गांव में पेयजल से लेकर बायो कंपोस्ट, जीबी पंत इंस्टीट्यूट की मदद से पॉलीहाउस भी मौजूद हैं।
इस गांव को जीबी पंत इंस्टीट्यूट की ओर से हर तरह ही खेती किसानी में मदद दी जा रही है। गांव में खेती भी खूब है। नजदीक बह रही कोसी नदी से पानी लिफ्ट कर गांव में पहुुंचाया जा रहा है। इफ्को ने भी गांव को अंगीकृत किया हुआ है। गांव में अदरक, लहसुन खूब होता है। तेजपात की खेती अब लोगों ने शुरू की है।
इसके बावजूद गांव से पिछले 15 सालों में ही पचास परिवार पलायन कर चुके हैं। गांव के प्रधान देवेंद्र नयाल के मुताबिक गांव में केवल 70 परिवार ही रह गए हैं। कभी यहां 120 परिवार हुआ करते थे।
वन पंचायत के सरपंच दीन दयाल के मुताबिक उच्च शिक्षा, बेहतर रोजगार की चाहत में ये परिवार गांव छोड़ गए। थोड़ा और कुरेदने पर ये कारण और पुख्ता होता है। यहां मजबूरी में हो रहा पलायन नहीं है।
साधन संपन्नता इन्हें शहर की ओर खींच रही है। उस शहर की ओर जहां बेहतर रोजगार के अवसर मौजूद हैं और उच्च शिक्षा की सुविधाएं हैं। वन्य जीवों के कारण खेती मुश्किल होती जा रही है।