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जिला मुख्यालय में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल

Sat, 16 Dec 2017 11:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
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 जिला मुख्यालय में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के सृजित बीस पदों में से पंद्रह पदों पर ही डाक्टर तैनात हैं। इनमें से तीन पदों पर काम चलाऊ व्यवस्था के तहत संविदा डाक्टर सेवाएं दे रहे हैं। अस्पताल में सर्जन ईएनटी सर्जन, दंत शल्यक समेत डॉक्टरों के पांच पद रिक्त हैं। सर्जन के पद पर पिछले एक साल से अधिक समय से नियुक्त नहीं होने से मरीजों के आपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। 
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जिला अस्पताल में जिले के अलावा सीमावर्ती जिलों पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर और गढ़वाल मंडल से भी लोग उपचार कराने पहुंचते हैं। पर राज्य में सत्तारूढ़ रहीं सरकारें इस अस्पताल में व्यवस्थाएं बेहतर करने में अब तक नाकाम ही साबित हुई हैं। सर्जन जैसे महत्वपूर्ण पद पर पिछले काफी समय से नियुक्ति नहीं हो पाई है। इस कारण अस्पताल में सामान्य आपरेशन भी नहीं हो पाते हैं। ईएनटी सर्जन का पद भी खाली है। चर्म रोग विशेषज्ञ, दंत शल्यक और चिकित्साधिकारी (एसटीडी) के पद भी खाली हैं। 

वहीं वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के दो पदों में से एक पद पर नियमित और एक पर संविदा डाक्टर तैनात हैं। इसके अलावा नेत्र सर्जन के दो पदों में से एक पर संविदा के अलावा ब्लड बैंक अधिकारी पद पर भी संविदा डाक्टर तैनात हैं। जिला मुख्यालय के अस्पताल में दूर दराज के क्षेत्रों से मरीज उपचार कराने आते हैं। विशेषज्ञ डाक्टरों के अभाव में मरीजों को काफी दिकक्तों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 350 मरीज उपचार कराने को आते हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ पिछले एक महीने से बागेश्वर में ड्यूटी पर थे। जिला अस्पताल में इस कारण हड्डी के रोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा था। अब सोमवार से हड्डी रोग जिला अस्पताल में ड्यूटी में रहेंगे। 
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रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर शासन को भेजी जाती है। सर्जन का पद रिक्त होने से आपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। 
प्रकाश वर्मा, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल, अल्मोड़ा। 

स्त्री रोग विशेषज्ञ के पांच पदों में से दो खाली 
अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में भी स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। मुख्य चिकित्साधीक्षक समेत चार डॉक्टरों के पद खाली हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ के पांच पदों में से मात्र एक में ही नियमित डॉक्टर है, जबकि दो डॉक्टर संविदा पर कार्यरत हैं। यदि ऐसी स्थिति में एक डॉक्टर छुट्टी पर चली जाएं तो अस्पताल की व्यवस्था पटरी से उतर जाती हैं। गर्भवती महिलाओं के आपरेशन से प्रसव नहीं हो पाते हैं। निश्चेतक के पास ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का प्रभार है। अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ का पद भी कई महीनों से खाली है। हालांकि चिकित्साधिकारी (ईएमओ) के दोनों पद भरे हुए हैं। एक ईएमओ काफी समय से छुट्टी पर हैं। अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में सौ मरीज पहुंचते हैं। महीने में करीब सौ प्रसव अस्पताल में होते हैं। 
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