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बीएसएनएल महाप्रबंधक कार्यालय बंद होने से पहाड़ के नेटवर्क पर पड़ेगा व्यापाक असर

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अल्मोड़ा। बीएसएनएल अल्मोड़ा के महाप्रबंधक का पद समाप्त होने के बाद अब पहाड़ के चारों जिलों में बीएसएनएल नेटवर्क संबंधित कई व्यावहारिक परेशानियां हो सकती हैं। बीएसएनएल के अल्मोड़ा एसएसए के चार जिलों समेत कुमाऊं के पूरे छह जिले हल्द्वानी से संचालित होंगे। इससे सीमांत जिलों की संचार व्यवस्थाओं के भी लड़खड़ाने की आशंका है। बीएसएनएल के कई उपभोक्ता भी चिंतित हैं।
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घाटे का सौदा बताते हुए अल्मोड़ा बीएसएनएल एसएसए के महाप्रबंधक कार्यालय को हल्द्वानी विलय किया जा रहा है। एक नवंबर से अल्मोड़ा जीएम कार्यालय बंद हो जाएगा और महाप्रबंधक संबंधित कार्य हल्द्वानी से संचालित होंगे।
अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत के चारों पहाड़ी जिले एसएसए अल्मोड़ा से संचालित थे। किसी भी तरह की समस्या आने पर यहां आसानी से महाप्रबंधक कार्यालय पहुंचा जा सकता था। कार्यालय का हल्द्वानी विलय होने के बाद लोगों को कई कार्यों के लिए 100 किमी दूर जाना पड़ेगा। नए टावर लगाने, नेटवर्क संबंधित समस्याएं आने पर भी लोगों को जीएम को समस्या बताने के लिए हल्द्वानी के चक्कर काटने पड़ेंगे।
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सीमांत पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे जिलों से लोगों को और भी अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी। कार्यालय का विलय होने के बाद लाइनों के रखरखाव में भी दिक्कतें आ सकती हैं। अल्मोड़ा में कार्यालय होने पर महाप्रबंधक के पास क्षेत्र अधिक और उपभोक्ता कम थे, लेकिन अब कुमाऊं के छह जिलों का कार्य हल्द्वानी से संचालित होने पर पहाड़ी जिलों में कार्य अधिक प्रभावित होंगे। एसएसए में शामिल चार जिलों के लिए बजट भी अलग से मिलता है, पर अब माना जा रहा है कि एक ही महाप्रबंधक के अधीन आने पर बजट में भी कटौती होने की संभावना है।
जनप्रतिनिधियों के लिए भी समस्या
अल्मोड़ा। नगर में कार्यालय होने से लोग आसानी से जीएम तक अपनी समस्या लेकर पहुंच जाते थे। नए टावर लगाने, नेटवर्क संबंधित शिकायत, लाइनों की मरम्मत आदि के लिए जनप्रतिनिधि भी समस्या लिए कार्यालय पहुंचते थे, लेकिन अब जनप्रतिनिधियों के लिए भी कार्यालय बंद होने पर बड़ी समस्याएं होंगी। जनप्रतिनिधियों को अपनी समस्या लिए हल्द्वानी के चक्कर काटने पड़ेंगे। आम जनता भी मीलों का सफर तय करना होगा।
सांसद प्रदीप टम्टा ने जताया कड़ा विरोध
अल्मोड़ा। राज्यसभा सदस्य और कांग्रेस के नेता प्रदीप टम्टा ने बीएसएनएल अल्मोड़ा से महाप्रबंधक का पद समाप्त होने पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि बागेश्वर, पिथौरागढ़ समेत पहाड़ का यह इलाका भौगोलिक दृष्टि से जटिल होने के साथ सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यहां संचार सेवाओं को पहले से अधिक दुुरुस्त करने की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने महाप्रबंधक कार्यालय बंद करने का निर्णय लेेकर इसे निजी हाथों में बेचने की ओर कदम उठाया है। व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए सरकार को पिथौरागढ़ और चंपावत में एक और जीएम दफ्तर खोलने की जरूर थी, लेकिन सरकार ने अल्मोड़ा का दफ्तर बंद कर आम जनता की सुविधाओं को दरकिनार किया है। सरकार ने बीएसएनएल में कार्य करने वाले एक लाख से अधिक कर्मचारियों को वीआरएस देकर घर भेज दिया था, इसके दुष्परिणाम दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने सरकार के इस कदम से आने वाले दिनों में बीएसएनएल को किसी बड़े व्यापारिक घराने को बेचने की भी आशंका जताई है।
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