पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री स्व. बची सिंह रावत (बचदा) को जहां रानीखेत विधानसभा से पहले भाजपा विधायक होने का गौरव प्राप्त था, वहीं उनकी पृष्ठभूमि भी जन आंदोलनों से जुड़ी रही है। नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे भी उन्होंने निशुल्क लड़े। कई आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका रही।
1988 में वह ताड़ीखेत ब्लॉक प्रमुख का चुनाव हारे। इसके बाद बचदा भाजपा संगठन को रानीखेत में स्थापित करने में जुट गए। पूरी विधानसभा में उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ संगठन को न केवल मजबूत किया, वरन कार्यकर्ताओं को एकजुट भी किया। 1989 में वह हालांकि विधानसभा चुनाव हार गए, लेकिन 1991 में वह भाजपा की ओर से रानीखेत विधानसभा से निर्वाचित होने वाले पहले विधायक बने।
1994 में फिर पार्टी ने उन्हें विधायक का चुनाव लड़ाया और वह जीत गए। उन्होंने अविभाजित उत्तर प्रदेश विधानसभा में उपराजस्व मंत्री बनाया गया। इसके बाद बचदा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
1996 के लोकसभा चुनाव में पहली बार सांसद का टिकट मिला और बचदा ने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत को हराया। 1998 में भी वह लोकसभा के सदस्य बने। 1999 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर उन्होंने हरीश रावत को हराया। 2004 में बचदा ने फिर से लोकसभा का चुनाव जीता। इस बार उन्होंने हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत को हराया।
कई संगठनों ने जताया शोक
रानीखेत। बचदा के निधन पर कई जनसंगठनों ने शोक जताया है। विधायक करन माहरा, ब्लॉक प्रमुख हीरा रावत, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गंगा सिंह रावत, शाकिर हुसैन, सीमा शर्मा, पूर्व अध्यक्ष राजेश रौतेला, जीडी करगेती, हिमांशु बिष्ट, संजय जोशी, दीपक कांडपाल, आरएस वैला, शिव मंदिर धर्मशाला कमेटी के अध्यक्ष कैलाश पांडे, अतुल अग्रवाल, अगस्त शाह, दिनेश अग्रवाल, जगदीश अग्रवाल, धर्मेंद्र अग्रवाल, पूरन नेगी आदि ने शोक जताया है।
इसके अलावा वरिष्ठ नेता मोहन नेगी, नरेंद्र रौतेला, भाजपा नेता डा. प्रमोद नैनवाल, विपिन शर्मा, रोहित शर्मा, त्रिभुवन शर्मा, प्रेम शर्मा, पूर्व दर्जा राज्य मंत्री रवि मोहन अग्रवाल, दिनेश तिवारी, प्रकाश करायत, गिरीश भगत, भुवन पपने, महिला आयोग उपाध्यक्ष ज्योति साह मिश्रा आदि भी शोक व्यक्त किया है।