रानीखेत (अल्मोड़ा)। आपाधापी के इस युग में जहां लोग छोटा सा धार्मिक अनुष्ठान कराने के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे हैं, वहीं अम्याड़ी की भाबर आमा के नाम से प्रख्यात 80 वर्षीय वृद्धा पना देवी निजी प्रयासों से अब तक 10 श्रीमद भागवत कथाएं करा चुकी हैं। सात अगस्त से 11वीं कथा प्रस्तावित है। भाबर अम्मा बाल विधवा हैं और घर पर अकेली रहती हैं। इस सद्कार्य के लिए वह अब तक अधिकांश भूमि तक बेच चुकी हैं।
मालूम हो कि श्रीमद भागवत कथा सबसे बड़ा अनुष्ठान माना जाता है, ऐसे में एक अकेली वृद्धा जो वृद्धावस्था पेंशन के सहारे गुजर कर रही हो, 10 बार इस अनुष्ठान को कराना बड़ी बात है। भाबर अम्मा बताती हैं कि 12 साल की आयु में उनका विवाह हुआ। विवाह के एक साल बाद उनके पति नंदा बल्लभ का निधन हो गया था, तब से वह अकेली हैं। वह कहती हैं कि मन में श्रद्धा भाव हो तो कोई भी काम कठिन नहीं होता।
वह बताती हैं कि उनके एक रिश्तेदार थे स्व. हंसादत्त पांडे, वह दिल्ली पुलिस में थे और धार्मिक व्यक्ति थे। 26 साल पहले जब उनका निधन हुआ तो वह उनसे नियमित रूप से भागवत कराने को कह गए। तब से वह इस अनुष्ठान को करा रही हैं। जब तक उनका शरीर है वह तब तक इस अनुष्ठान को संपन्न कराती रहेंगी। वह भागवत कराने के लिए अपनी अधिकांश जमीन बेच चुकी हैं।
घास बेचकर इस आयोजन को पूरा कराती हैं। सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश जोशी ने बताया कि भाबर अम्मा मजबूद इरादे वाली महिला हैं। इसीलिए लगातार यह सद्कार्य करा रही हैं, हालांकि गांव के लोग भी इस कार्य में उनकी मदद करते हैं। 10 दिनी भागवत के बाद दो से तीन गांव के लोग प्रसाद लेने पहुंचते हैं।
रानीखेत। पना देवी सर्दियों में अपने ननिहाल रामनगर (भाबर) चली जाती हैं। इसीलिए वह इस इलाके में भाबर आमा के नाम से विख्यात हैं। भाबर अम्मा 80 साल की आयु में भी काफी कर्मठ हैं। सारा कार्य अकेले कर रही हैं। लोग उनकी कर्मठता को देखकर दांतों तले उंगली दबाते हैं।