अल्मोड़ा। प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि एनएच-109 पर क्वारब के पास बार-बार यातायात अवरोध होने से लोगों ने जनजीवन पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। क्वारब के बंद होने से कुमाऊं क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं चौपट हो गई हैं। आंदोलन के तीसरे चरण में कुमाऊं के सभी व्यापारी सामूहिक आंदोलन करेंगे।
पत्रकार वार्ता में व्यापार मंडल अध्यक्ष सुशील साह ने कहा कि क्वारब मार्ग पूरे कुमाऊं क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की धड़कन है। वर्तमान में ये धड़कन लगातार रुक रही है। सरकार केवल आश्वासन दे रही है।
अध्यक्ष साह ने कहा कि पिछले एक साल से क्वारब के पास भूस्खलन से मलबा गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। बारिश मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। रात के समय यातायात पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाता है जिससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ता है। क्वारब के कारण माल ढुलाई में देरी होने के कारण व्यापारिक गतिविधियां ठप हो गई हैं।
कुमाऊं की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा पर्यटन पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ा है। त्योहारों के दौरान आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो रही है। इसका असर शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मरीजों के लिए समय से अस्पताल पहुंचना गंभीर चुनौती बन गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि 15 दिन में ठोस कदम नहीं उठाए तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
इस मौके पर जिला कार्यकारी अध्यक्ष संजय अग्रवाल, जिला महामंत्री भैरव गोस्वामी, नगर व्यापार मंडल के सचिव वकुल साह, ट्रांसपोर्ट यूनियन के सचिव फईम खान, जिला मंत्री सुधीर गुफ्ता, मनोज वर्मा मौजूद रहे।
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क्वारब के कारण आम लोगों पर पड़ ये असर
प्रांतीय उद्योग व्यापार के जिलाध्यक्ष सुशील साह ने कहा कि क्वारब के कारण परिवहन विभाग का ट्रांसपोर्ट भाड़ा प्रति क्विंटल 100 रुपये बढ़ गया है। 40 प्रतिशत पर्यटक आवागमन प्रभावित हुआ है। होटल की बुकिंग रद्द हो रही है। विद्यालयों और कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में 25 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई हैं। क्वारब का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा है। आपातकालीन एंबुलेंस सेवा लगातार प्रभावित हो रही हैं। रोगी समय से हायर सेंटर नहीं पहुंच पा रहे हैं। संवाद
व्यापारियों ने रखी ये मांग
- क्वारब 24 घंटे सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही के लिए खुला रखा जाए
- आपातकालीन स्थितियों के लिए विशेष प्रोटोकॉल तैयार हो।
- रिटेनिंग वॉल का निर्माण तेज गति से किया जाए
- ढलानों का सुदृढ़ीकरण हो
- भूस्खलन रोकने के लिए वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग
- मशीनरी और संसाधनों की हो बढ़ोतरी
- मलबा हटाने का काम 24x7 हो
- क्वारब पर चल रहे कार्यों की मासिक समीक्षा हो
- गुणवत्ता जांच की जाए
- त्योहारी सीजन से पहले समस्या का समाधान