एक जमाने में अल्मोड़ा नगर और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था प्राकृतिक जल स्रोत पर निर्भर थी। अस्सी के दशक तक अल्मोड़ा नगर क्षेत्र में ही सौ से अधिक नौले थे, लेकिन अब 50 से भी कम नौले रह गए हैं। जो नौले बचे भी हैं वह या तो देखरेख के अभाव में नष्ट हो रहे हैं अथवा अतिक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। लोगों की बार-बार मांग के बावजूद इन नौलों के देखरेख की जिम्मेदारी किसी विभाग को नहीं सौंपी गई है। अगर इन्हें इसी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया गया तो धीरे-धीरे इनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
अल्मोड़ा नगर की खासियत है कि यहां प्रत्येक मोहल्ले में नौले हैं। नरसिंहबाड़ी में नौ, थपलिया में छह, चंपानौला और बाड़ीबगीचा में चार-चार समेत सभी मोहल्लों में नौले हैं। पूर्व में लोग इन्हीं नौलों का पानी उपयोग करते थे। आधुनिकीकरण के साथ ही लोगों के घर-घर तक पेयजल लाइनें पहुंच गईं। नौलों पर लोगों की निर्भरता कम होती गई और इनकी ओर लोगों का ध्यान कम हो गया। जनता के साथ ही सरकारी विभाग और स्वयं सेवी संस्थाओं ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
बढ़ते शहरीकरण के चलते की लोगों ने कई स्थानों पर इन नौलों में अतिक्रमण कर आलीशान मकान बना लिए। वहीं देखरेख के अभाव में कई नौले सूख भी चुके है। ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं होने से अधिकांश नौले प्रदूषित हो गए हैं। जिनका पानी पीने योग्य नहीं है।