पद्म श्री स्व. मोहन चंद्र पंत के गांव कुणकोली को जोड़ने वाली अम्याड़ी-कुणकोली सड़क खतरनाक हाल में है। स्वीकृति के आठ साल बाद भी इस मार्ग में न तो डामर हो सका है और ना ही सोलिंग का कार्य। बरसात में सड़क का हाल और भी बुरा है। किसी तरह जीप चालक जान जोखिम में डालकर सवारियों को इधर-उधर ले जा रहे हैं। सब्जी बहुल क्षेत्र होने के कारण काश्तकारों को उत्पाद बाजार पहुंचाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने शीघ्र मोटर मार्ग का सुधारीकरण करने की मांग की है। मालूम हो कि स्व. एमसी पंत यहां कुणकोली गांव के रहने वाले थे। अम्याड़ी से गांव की पैदल दूरी पांच किमी से अधिक है। स्व. पंत ने भी इस सड़क के लिए काफी प्रयास किए थे। 2008 में इस 3.75 किमी मोटर मार्ग को स्वीकृति मिली, लेकिन न तो इस सड़क में सोलिंग का कार्य हुआ है और ना ही डामर पड़ा है।
सड़क में दीवारों का निर्माण तक नहीं हुआ है। जगह-जगह मलबा पटा पड़ा है। बड़े-बड़े गड्ढों से मार्ग की हालत बदहाल है। इस क्षेत्र में सब्जी उत्पादन का कार्य प्रचुर मात्रा में होता है। सड़क खराब होने से ग्रामीणों को उत्पाद बजार पहुंचाने में भारी परेशानी हो रही है। इधर ग्रामीणों में सड़क की बदहाली से आक्रोश व्याप्त है। प्रधान लक्ष्मण सिंह नेगी, छावनी परिषद सभासद संजय पंत, सुभाष विचार मंच के संयोजक मोहन नेगी, भुवन चंद्र पंत सहित तमाम लोगों ने लोनिवि से तत्काल मार्ग की हालत सुधारने की मांग की है।