कुमाऊं एसएसजे परिसर में सुप्रसिद्ध साहित्यकार अमृतलाल नागर की जन्मशताब्दी पर दो दिवसीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। वक्ताओं ने साहित्यकार नागर कहा कि साहित्यकार नागर ने न सिर्फ बाल कहानी, उपन्यास का सृजन किया बल्कि संसार भर के महापुरुषों के जीवन चरित्र को भी अत्यंत सुंदर ढंग से सरल भाषा में चित्रित किया।
महादेवी वर्मा सृजन पीठ के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में साहित्य अकादमी के पूर्व उपसचिव ब्रजेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि नागर बतौर साहित्यकार नैतिक मूल्यों के प्रति सदैव सचेत रहे। कहा कि नागर जी के पाठक कभी भी बूढ़े नहीं होते बल्कि समझदारी का दायरा निरंतर विकसित होता है। कथाकार मुकेश नौटियाल और बाल साहित्यकार डॉ. चेतना उपाध्याय ने कहा कि नागर जी के साहित्य आज स्कूलों और महाविद्यालयों के शैक्षिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बन चुके हैं। अध्यक्षता करते हुए कुमाऊंनी भाषा विभाग के संयोजक प्रो. शेर सिंह बिष्ट ने कहा कि नागर जी के बाल मन ने मध्यवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवेश में घटित आचार व्यवहार को जाने अनजाने आत्मसात किया। साहित्यकार डॉ. दिवा भट्ट, डॉ. राकेश चक्र, डॉ. आरती स्मित, नीरज पंत, प्रकाश चंद्र जोशी, रतन सिंह किरमोलिया, डॉ. अनिल कार्की, डॉ. ललित चंद्र जोशी, डॉ. विजय लक्ष्मी, डॉ. सुनीता भंडारी, पवनेश ठकुराठी, हरिमोहन ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया। संचालन महादेवी वर्मा सृजन पीठ के निदेशक प्रो. देव सिंह पोखरिया ने किया। कार्यक्रम में अमृत लाल नागर की पौत्री डॉ. दीक्षा नागर, डॉ. राज सक्सेना, मोहन सिंह रावत, नवीन डिमरी, डॉ. हयात सिंह रावत, उदय किरौला, रमेश चंद्र पंत, विमला जोशी, डॉ. दीपाली कनवाल, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, डॉ. राजेंद्र बिष्ट, डॉ. किरन दानू, खुशाल सिंह खनी, डॉ. तेजपाल सिंह समेत कई साहित्यकार थे।