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जिला अस्पताल में ऑपरेशन ठप, लेकिन उपचार की दरों में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी

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अल्मोड़ा। सरकारी अस्पतालों में इलाज लगातार महंगा होता जा रहा है, लेकिन नगर के अस्पतालों में ऑपरेशन तक की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल में सर्जन, अस्थि रोग विशेषज्ञ और निश्चेतक लंबे अवकाश पर हैं, जबकि बेस अस्पताल कोविड सेंटर बन चुका है। इसके चलते अस्पतालों में ऑपरेशन ठप हैं। मरीजों को ऑपरेशन के लिए हल्द्वानी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, या फिर मजबूरन निजी अस्पतालों में महंगी दर पर ऑपरेशन करवाने पड़ रहे हैं।
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कोरोना काल की शुरुआत से ही बेस अस्पताल कोविड अस्पताल बन चुका है। बेस में पिछले साल से ही ऑपरेशन बंद हैं। इसके चलते जिला अस्पताल में ही मरीजों का दबाव अधिक है, लेकिन जिला अस्पताल में करीब चार माह पूर्व निश्चेतक उच्च शिक्षा के लिए अवकाश पर चले गए। इसके चलते अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि इसके बाद भी गंभीर या आपातकालीन स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था कर कुछ सामान्य ऑपरेशन किए जा रहे थे, लेकिन अब पिछले माह से सर्जन भी उच्च शिक्षा के लिए ही अवकाश पर जा चुके हैं। इससे पेट संबंधी उपचार के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है। ऑपरेशन के लिए भी मरीजों को मजबूरी में हल्द्वानी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अस्थि रोग विशेषज्ञ भी लंबे अवकाश पर हैं। हालांकि बेस के अस्थि रोग विशेषज्ञ को जिला अस्पताल में संबद्ध कर दिया गया है, लेकिन फिलहाल ऑपरेशन न होने से मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इधर सरकार की ओर से इलाज की दरों में दस प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है। उपचार की दरों में बढ़ोतरी के बावजूद मरीजों को उचित स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सरकारी अस्पतालों में बेहतर उपचार न मिलना बहुत बड़ी समस्या है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों से उम्मीदें रहती हैं। सरकार सिर्फ उपचार की दरें बढ़ा रही है लेकिन जरूरी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल में ऑपरेशन न होने से मरीजों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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-डॉ. सरिता त्रिकोटी।
महानगरों में कोरोना टेस्ट के बाद ऑपरेशन हो रहे हैं, लेकिन यहां ऑपरेशन ही बंद हैं। इससे मरीजों को हल्द्वानी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उपचार तो महंगा हो रहा है लेकिन सेवाएं आज भी कोई खास नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को सरकारी अस्पतालों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
-पूनम कपूर, नगरवासी।
अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन लगभग एक साल के इंतजार के बाद भी जरूरी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इससे मरीजों को निजी अस्पतालों में जाकर महंगा उपचार कराना पड़ रहा है।
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-प्रेमा जोशी, अल्मोड़ा।
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