धरोहरों के संरक्षण के प्रति समाज और जिम्मेदार विभाग उदासीन बने हुए हैं। अल्मोड़ा के ऐतिहासिक नंदादेवी मंदिर के गुंबद और दीवारों पर जगह-जगह पीपल के पौधे और झाड़-झंखाड़ उग गए हैं। यह ऐतिहासिक मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है, लेकिन विभाग सिर्फ दिशा-निर्देश देने तक ही सीमित है।
16वीं सदी में नागर शैली में बने नंदा देवी मंदिर धार्मिक आस्था के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन और सामाजिक, राजनैतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। इस धरोहर के संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग के पास है, लेकिन इसकी सही देखरेख नहीं हो पा रही है।
नियमानुसार मंदिर और उसके परिसर में कोई भी सुधार कार्य, नवनिर्माण पुरातत्व विभाग की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता, जिससे क्षेत्र के लोग भी कोई पहल नहीं करते। लंबे समय से जीर्णोद्धार और पॉलिश ने होने से मंदिर की दीवारों पर पीपल के पौधे उग आए हैं। इसके अलावा झाड़-झंखाड़ से भी इसकी सुंदरता प्रभावित हो रही है।
साथ ही मंदिर के पत्थर खिसकने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इधर पुरातत्व विभाग के अन्वेषण सहायक चंद्र सिंह चौहान ने कहा कि संरक्षण की जिम्मेदारी विभाग की है। विभाग द्वारा समय-समय पर मंदिरों की सफाई कार्य किए जाते हैं। नंदादेवी मंदिर की दीवारों में उग आए पौधों और झाड़ को हटाने, पॉलिश, धुलाई आदि को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। बजट नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो सका है। धनराशि मिलने के बाद काम होगा।