ताकुला ब्लॉक के जीआईसी गणानाथ को मॉडल स्कूल का दर्जा मिले एक साल पूरा होने वाला है, लेकिन विद्यालय में प्रवक्ता के स्वीकृत 10 पदों में से छह पद खाली हैं। विद्यालय में प्रधानाचार्य का पद भी 10 साल से खाली है। पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षक-अभिभावक संघ समेत सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर स्कूल की समस्याओं का समाधान करने की मांग की है।
गणानाथ इंटर कालेज की स्थापना 1946 में गणानाथ विद्यापीठ के नाम से संस्कृत विद्यालय के रूप में की गई थी। स्वतंत्रता संग्राम में भी इस स्कूल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और यहां से शिक्षा प्राप्त कर कई लोगों ने आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर देश सेवा की है। 1989 में प्रांतीयकरण के बाद शासन प्रशासन की उदासीनता के कारण स्कूल की स्थिति बिगड़ने लगी। जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि मॉडल स्कूल का दर्जा दिए एक साल पूरा होने को आ रहा है और स्कूल में 10 पदों के सापेक्ष मात्र चार शिक्षक ही कार्यरत हैं। विद्यालय में अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भौतिकी, रसायन, गणित जैसे प्रवक्ता के पद खाली हैं।
प्रधानाचार्य का पद 10 सालों से रिक्त है और स्कूल में लिपिक नहीं होने से इस कार्य को भी शिक्षक और प्रभारी प्रधानाचार्य करते आ रहे हैं। 183 छात्र संख्या वाले विद्यालय में मात्र 100 बच्चों के बैठने के लिए ही फर्नीचर उपलब्ध है। पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी से समस्याओं के समाधान के लिए जल्द कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में लोक प्रबंध विकास संस्था सुनोली के ईश्वर जोशी, वन पंचायत सरपंच संगठन के अध्यक्ष डूंगर सिंह भाकुनी, प्रधान रघुवर जोशी, बसंत लाल वर्मा, राजेंद्र प्रसाद, ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष सुनील बाराकोटी, अनिता कनवाल, डीवाईएफआई के यूसुफ तिवारी शामिल हैं।