जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों और एक पुरुष स्टाफ नर्स की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अस्पताल स्टाफ के साथ अभद्रता करने से कर्मचारी गुस्से में हैं। अस्पताल कर्मियों और पैरा मेडिकल स्टाफ ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। सुबह नौ बजे से दोपहर 1:45 तक कार्य बहिष्कार के बाद डॉक्टरों और स्टाफ नर्स के सार्वजनिक खेद जताने के बाद उन्होंने कार्य बहिष्कार खत्म किया।
मंगलवार को सीएचसी के पैरा मेडिकल स्टाफ और कर्मियों ने अभद्रता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। कर्मियों का कहना था कि नशे में धुत जिला अस्पताल के दो डॉक्टर और एक स्टाफ नर्स 9 फरवरी को यहां फर्जी नाम बताकर पेशाब रुकने की बात कहकर इलाज करने की बात कहने लगे।
आरोप है कि इसके बाद उन्होंने कर्मियों से अभद्रता की। लोहाघाट अस्पताल के कर्मियों दोनों आरोपियों के माफी नहीं मांगने तक कार्य बहिष्कार जारी रखने का एलान किया। जानकारी मिलने पर चंपावत के मुख्य चिकित्साधिकारी ने लोहाघाट अस्पताल पहुंच 1.45 बजे आरोपी डॉक्टरों और कर्मी से सार्वजनिक खेद प्रकट करवाया। इसके बाद कार्य बहिष्कार खत्म हुआ।
कार्य बहिष्कार करने वालों में प्रमोद कुमार, संजय दताल, हरीश कुमार, विनोद उप्रेती, सीमा महर, सीमा बिष्ट, अंशु मिश्रा, दीपक बिष्ट, बहादुर सिंह, दिनेश, शैलेश पांडेय, निर्मल मुरारी, सरोजनी बिष्ट, सचिन कुमार आदि मौजूद थे।
पर्ची काटने को चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा
सीएचसी लोहाघाट के आक्रोशित कर्मचारियों की ओर से पर्ची नहीं काटे जाने से लोग परेशान रहे। सबसे अधिक दिक्कत गर्भवतियों को झेलनी पड़ी। वे करीब चार घंटे से अधिक समय तक पर्ची काटने का इंतजार करतीं रहीं। कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार खत्म करने के बाद अस्पताल में करीब 60 से अधिक रोगियों की पर्ची काटी गई। बलांई की सुनीता बिष्ट, पाटी की निर्मला देवी, देवीधुरा की तनुजा देवी, खीडी पोखरी देवकी देवी, दिगालीचौड़ की तनुजा, सुदर्का की लक्ष्मी देवी, बापरू की गीता फर्त्याल, नौमाना रेनू देवी, मटियानी की मीना देवी आदि तमाम महिलाएं लाइन में खड़ी होकर पर्ची कटाने का इंतजार करती रहीं। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एलएम रखोलिया ने 25 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए।
कर्मियों के सामने जताया खेद
सीएचसी में कर्मियों के कार्य बहिष्कार की सूचना मिलने पर सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी आनन-फानन में लोहाघाट पहुंच गए। पूर्व जिला पंचायत सदस्य सचिन जोशी ने कार्य बहिष्कार के चलते रोगियों को हो रही दिक्कतों की जानकारी डीएम और सीएमओ को दी। कर्मियों के गुस्से को देखते हुए आरोपी डॉक्टर और स्टाफ नर्स लोहाघाट थाने पहुंचकर पुलिस सुरक्षा में अस्पताल पहुंचे, जबकि एक अन्य डॉ. मनीष बिष्ट चंपावत से बाहर होने के कारण नहीं पहुंचे। सीएमओ और आक्रोशित कर्मचारियों के सामने अस्पताल परिसर में डॉ. शशांक अधिकारी और विकास ने अभद्रता के लिए सार्वजनिक तौर पर खेद जताया। इसके बाद मामला शांत हुआ। इधर, सीएमओ ने बताया कि मामले की सूचना शासन, स्वास्थ्य महानिदेशक और सुशीला तिवारी कॉलेज के प्राचार्य को भी दी जाएगी।
जिला अस्पताल के सीएमएस कराएंगे जांच, मांगा स्पष्टीकरण
वेतन रोकने के आदेश भी दिए डॉक्टर और स्टाफ नर्स के 9 फरवरी की रात ड्यूटी छोड़ लोहाघाट पहुंचने को मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी ने गंभीर मामला बताया। सीएमएस ने दोनों डॉक्टरों और स्टाफ नर्स से स्पष्टीकरण तलब करते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है। साथ ही आरोपियों का वेतन रोकने के आदेश भी दिए हैं। अभद्रता करने के आरोपी दोनों डॉक्टर चंपावत जिले के निवासी हैं। 27 जनवरी को च्यूरानी में हुए जीप हादसे के बाद वे जिला अस्पताल में संबद्ध किए गए थे।
सिप्टी अस्पताल से जिला अस्पताल में संबद्ध डॉ. मनीष बिष्ट और पुरुष स्टाफ नर्स विकास की 9 फरवरी की रात को जिला अस्पताल में ड्यूटी थी। ऐसे में ये दोनों कर्मी अस्पताल छोड़ लोहाघाट किसकी इजाजत से पहुंचे, इसका स्पष्टीकरण मांगा गया है। वहीं, धौन से जिला अस्पताल में संबद्ध डॉ. शंशाक अधिकारी चंपावत से बाहर हैं। इन डॉक्टरों का कहना था कि लोहाघाट अस्पताल से बगैर किसी परीक्षण के रोगियों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा था। इसके मद्देनजर वे लोहाघाट गए थे। उन्होंने अभद्रता के आरोप को निराधार बताया।