भारत सरकार द्वारा समस्याओं का समाधान नहीं करने से गुस्साए अधिवक्ता मंगलवार को कार्यों से विरत रहे। जिला बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने कलक्ट्रेट में नारेबाजी कर जुलूस निकाला। बाद में मांगों को लेकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार खुशबू आर्या को सौंपा।
जिला मुख्यालय स्थित न्यायालयों का कार्य बहिष्कार कर अधिवक्ता कलक्ट्रेट स्थित बार भवन में एकत्र हुए। यहां से उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय प्रांगण तक जुलूस निकाला। इस मौके पर बार के अध्यक्ष महेश परिहार ने कहा कि केंद्र सरकार अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही है।
न्यायालय परिसर में अधिवक्ता संघों के लिए भवन, बैठने की समुचित व्यवस्था, पुस्तकालय, ई-लाइब्रेरी, शौचालय, मुफ्त इंटरनेट की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नए जरूरतमंद वकीलों को पांच साल तक 10 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएं। वक्ताओं ने सभी अधिवक्ताओं और उनके परिवार का जीवन बीमा कराने, आकस्मिक मृत्यु पर पचास लाख रुपये मुआवजा देने, बीमारी में निशुल्क उपचार, अक्षम और वृद्ध वकीलों के लिए पेंशन और पारिवारिक पेंशन दी जाए।
लोक अदालत के कार्य वकीलों के जिम्मे होने चाहिए। इससे न्यायिक पदाधिकारियों और न्यायाधीशों को दूर रखा जाए। उन्होंने कहा कि मांगों को लेकर पूर्व में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भारत सरकार को ज्ञापन भेजा था पर केंद्र सरकर ने कोई कार्रवाई नहीं की है। प्रदर्शन में बार अध्यक्ष परिहार के अलावा उपाध्यक्ष कुंदन लटवाल, सचिव भूपेंद्र मियान, पीसी तिवारी, चामू सिंह गस्याल, गोविंद लाल वर्मा, नीरू तिवारी, हिमांशु मेहता, जगदीश तिवारी, कमलेश कुमार, डीके जोशी, एनएस जीना, केएन पांडे, गोपाल साह, जगत रौतेला, जगदीश पांडे, केवल सती, लवली दास्पा, केएस बिष्ट, त्रिलोक लटवाल, गोधन बिष्ट आदि उपस्थित थे।