बरसात के मौसम को देखते हुए जिला मुख्यालय सहित सभी तहसीलों में आपदा नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए गए हैं। आपदा पूर्व तैयारी के कार्यों की देखरेख और सामंजस्य स्थापित करने को सेवन डेस्क सिस्टम लागू कर दिया गया है।
इसके लिए नोडल अधिकारी और समन्वयक अधिकारी भी नामित कर दिए गए हैं। आपदा नियंत्रण कक्ष में परिचालन, सेवा, अवस्थापना, स्वास्थ्य, कृषि, संचार-सूचना, संसाधन डेस्क की व्यवस्था की गई है।
तहसीलों में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं। कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे काम करेंगे। मानसून सत्र को देखते हुए सड़क खोलने को जेसीबी की व्यवस्था करने के निर्देश लोनिवि को दिए गए हैं, ताकि बरसात होने पर सड़कें बंद नहीं हों।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश कुमार जोशी ने बताया कि जिला मुख्यालय समेत तहसीलों में वुड-कटर, कंकरीट-कटर, रोप, लाइट समेत अन्य उपकरण उपलब्ध करा दिए गए हैं।
शासन से और वुड-कटर समेत अन्य खोज बचाव उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। तहसीलों में वर्षामापी यंत्र (रेन गेज) लगाए गए हैं। बारिश होने पर प्रतिदिन तहसीलों से जिला मुख्यालय में बारिश की सूचना देने को कहा गया है।
पुलिस के त्वरित प्रतिवादन दल (क्यूआरटी) को हर वक्त सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर त्वरित आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचा जा सके।
साथ ही नदियों में बाढ़ नियंत्रण के लिए सिंचाई विभाग को कदम उठाने को कहा गया है। इसके अलावा जिले में करीब ढाई हजार स्वयं सेवक भी आपदा कार्य में सहयोग करेंगे।