चिन्हीकरण की मांग को लेकर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने यहां नगर पंचायत प्रांगण में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। शासनप्रशासन पर राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा का आरोप लगाया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज भी कई वास्तविक आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित हैं। चिन्हीकरण में पूरी तरह से भेदभाव बरता जा रहा है।
राज्य आंदोलनकारी मनोज अधिकारी ने कहा कि 23 फरवरी 1988 को राज्य आंदोलन को लेकर जेल भरो आंदोलन में 104 आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी हुईऽ लेकिन उसमें से मात्र 14 लोगों को ही चिन्ह्ति किया गया है। 20 अक्तूबर 1995 को रानीखेत में 12 लोगों की गिरफ्तारी हुई। उसमें से मात्र नौ लोग ही चिन्ह्ति हुए हैं। शासनप्रशासन के भेदभावपूर्ण रवैये के चलते कई बार आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन आज तक मांग पूरी नहीं हुई है। कहा कि इस बार आंदोलन निर्णायक होगा। महेश त्रिपाठी, मोहन रावत, धनी राम, मनोहर दत्त, गोपाल राणा, दान सिंह राणा, नवीन जोशी, लक्ष्मण सिंह, किशन नेगी, कुंदन राम, कैलाश फुलारा, रवि जोशी, लाल सिंह सहित तमाम लोग मौजूद थे।