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फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे शिक्षक बने आरोपी को तीन साल की सजा

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अल्मोड़ा। अपर सत्र न्यायाधीश आरके श्रीवास्तव की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए फर्जी बीटीसी प्रमाणपत्र से सहायक शिक्षक की नौकरी पाने वाले विजेंद्र कुमार निवासी किराना, रामपुर कृष्णा, जिला बिजनौर को तीन साल की सजा और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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विजेंद्र कुमार ने अल्मोड़ा जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूड़ा विकासखंड लमगड़ा में 21 जनवरी 1992 को प्राथमिक शिक्षक पर नियुक्ति पाई। अक्तूबर 2001 में उसका तबादला हरिद्वार जिले में हो गया और सहायक शिक्षक राजकीय प्राथमिक विद्यालय बहादरपुर जट-2 में तैनाती मिली। विजेंद्र कुमार के बीटीसी प्रमाणपत्र फर्जी होने को लेकर लमगड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
शिकायत मिलने के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार ने प्रधानाचार्य राजकीय हाईस्कूल ज्वालापुर कला हरिद्वार को जांच अधिकारी नामित किया। रजिस्ट्रार परीक्षा नियामक प्राधिकारी उत्तर प्रदेश इलाहाबाद ने जांच उपरांत विजेंद्र के बीटीसी प्रमाणपत्र फर्जी पाए। विजेंद्र ने प्रमाण पत्रों में 1988 में बरेली जिले से प्रशिक्षण लिया होना दर्शाया था।
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पुलिस ने मामले की विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले का विचारण न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा के न्यायलाय में हुआ था। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी विजेंद्र कुमार को धारा 420 में तीन साल की सजा और तीन हजार रुपये अर्थदंड, धारा 47 में दो वर्ष की सजा और दो हजार रुपये अर्थदड से दंडित किया था। इस निर्णय के खिलाफ आरोपी शिक्षक ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश अल्मोड़ा के न्यायालाय में अपील की थी। जहां से मामला अपर सत्र न्यायाधीश अल्मोड़ा के न्यायालय में स्थानांतरित हुआ। अपर सत्र न्यायाधीश ने मामले का गहन अध्ययन करने के बाद आरोपी शिक्षक विजेंद्र कुमार की सजा को यथावत रखते हुए धारा 420 तीन साल की सजा और तीन हजार रुपये अर्थदंड, धारा 47 में दो साल की सजा और दो हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गिरीश चंद्र फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदरी शेखर चंद्र नैल्वाल और हरीश मनराल, विशेष लोक अभियोजक भूपेंद्र कुमार जोशी के मामले में प्रभावी पैरवी की।
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