आम के पोड़ों पर लगा चैंपा रोग।
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रसीले आम की घाटी में मौसम का बिगड़ा मिजाज कहर साबित हो रहा है। विकासखंड में चैंपा और फूंगा रोग से आम की पचास प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई है। उद्यान विशेषज्ञों का मानना है कि दस दिन के भीतर बारिश न होने पर शेष बचे आमों की फसल भी चौपट हो सकती है।
रसीले आम की घाटी चौखुटिया में करीब दो हजार मैट्रिक टन आम का उत्पादन होता है।
पिछले माह तक बौर से भरे आम के पेड़ों को देखते हुए इस बार आम के रिकार्ड उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन पर्याप्त बारिश न होने से बिगड़े मौसम के मिजाज ने फसल की रंगत ही उड़ा दी है। क्षेत्र में पचास प्रतिशत फसल चैंपा और फूंगा रोग से बर्बाद हो गई है। दोनों रोगों के चलते पेड़ों से चिपचिपा पदार्थ गिर रहा है जबकि पत्तियां झुलसकर पीली पड़ गई हैं। इधर आम की फसल बर्बाद होने से अच्छे उत्पादन की उम्मीद लगाए बैठे काश्तकार भी निराश हैं।