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शादी में न बजी शहनाई, न हुई आतिशबाजी

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अल्मोड़ा के गायत्री प्रज्ञापीठ में विवाह बंधन में बंधे मुकेश बोरा और शैफाली। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। वसंत पंचमी पर नगर के थपलिया लिंक रोड स्थित गायत्री प्रज्ञापीठ में ऐसी शादी हुई, जिसमें न बैंडबाजे की धूम सुनाई दी और न ही आतिशबाजी हुई। दिल्ली के सचिवालय में तैनात युवक और एमबीए पास युवती ने आदर्श विवाह संस्कार के तहत दहेज रहित विवाह कर नजीर पेश की।
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वसंत पंचमी के दिन गायत्री प्रज्ञापीठ में एक आदर्श विवाह संस्कार संपन्न हुआ। अल्मोड़ा जिले के चौना सूनीधारा दौलाघट निवासी पूरन सिंह बोरा के पुत्र डॉ. मुकेश सिंह बोरा उर्फ संजू और दिल्ली की युवती शैफाली सक्सेना सादे समारोह में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच एक दूजे के हो गए। इस शादी में न शहनाई गूंजी और न ही आतिशबाजी हुई। गायत्री परिवार के भीम सिंह अधिकारी समेत अन्य गायत्री परिजनों ने दोनों की शादी संपन्न कराई। भीम सिंह अधिकारी ने कहा कि इस तरह के विवाह से समाज में दहेज रूपी दानव को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने अन्य लोगों से भी दहेज रहित विवाह करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आदर्श विवाह कर फिजूलखर्ची से बचा जा सकता है। बता दें कि दिल्ली सचिवालय में कोआर्डिनेटर के पद पर तैनात मुकेश ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। वहीं शैफाली सक्सेना ने एमबीए किया है।
समाज में दहेज के चलन को खत्म करना होगा : बोरा
अल्मोड़ा। पूरन सिंह बोरा ने बताया कि इस तरह की शादियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे अन्य लोग भी ऐसी शादी करने के लिए प्रेरित हों। उन्होंने बताया कि आज समाज में दहेज का प्रचलन काफी बढ़ गया है। मेहनत मजदूरी करने वाले लोगों के लिए अपनी बेटी के हाथ पीले करना मुश्किल होते जा रहा है। यदि दहेज रूपी दानव खत्म हो जाएगा तो हर पिता को अपनी लाडली को विदा करने के लिए कर्ज के बोझ तले नहीं दबना पडे़गा। समारोह में डॉ. जेसी दुर्गापाल, योगेश जोशी, मोहन पांडे, भूपेंद्र बिष्ट, जगत कनवाल, प्रताप कनवाल, सरोज भट्ट, मंजू जोशी आदि थे।
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