अल्मोड़ा। बचपन बचाओ आंदोलन के कैलाश सत्यार्थी को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलने पर अनेक संगठनों ने प्रसन्नता जर्ताई है। उन्होंने कहा कि सत्यार्थी को नोबेल मिलने से वैश्विक स्तर पर बाल अधिकारों के मुद्दों को मान्यता मिली है। इससे दुनिया में बाल मजदूरों के मुक्ति को संघर्ष और आगे बढ़ेगा।
संगठनों की यहां हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि 2001 की जनगणना के मुताबिक भारत में सवा करोड़ बाल मजदूर चिन्हित किए गए थे। बाल मजदूरी पर रोक को प्रभावशाली कानून बनाए जाने की जरूरत है। बाल मजदूरी को लेकर तैयार विधेयक 2012 संसद में लंबित पड़ा है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए सभी प्रकार की मजदूरी प्रतिबंधित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में बाल मजदूरी हटाने के लिए कैलाश सत्यार्थी ने काफी संघर्ष किया। नोबेल पुरस्कार मिलने से सत्यार्थी समेत इस क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के संघर्ष और भी तेज होगा। सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार मिलने पर उत्तराखंड बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान और अमन संस्था के रघु तिवारी, चाइल्ड राइट्स एक्टविस्ट नीलिमा भट्ट, उत्तराखंड युवा नेटवर्क के जगदीश कुमार आदि ने खुशी जताई है।