रानीखेत (अल्मोड़ा)। वाल्मीकि जयंती की शोभायात्रा के दौरान अखाड़ा जैसी साहसिक गतिविधियां अब सिर्फ परंपरा निभाने तक सीमित रह गई हैं। एक दशक पूर्व तक पर्वों के समापन पर शोभायात्रा में वाल्मीकि समुदाय के लोग अखाड़े में हैरतअंगेज करतब दिखाकर रौंगटे खड़े कर देते थे। स्व. लाला रामचरण, नानक चंद्र, प्यारे लाल और मुन्ना ठेकेदार जैसे लोगों के नेतृत्व में युवाओं का अनुशासित अखाड़ा प्रदर्शन कई दिनों तक याद किया जाता था।
नगर के गांधी चौक, केएमओयू स्टेशन, रोडवेज स्टेशन सहित कई स्थानों पर अखाड़े के करतब दिखाए जाते थे। इनमें शरीर के ऊपर से वाहन गुजरना, आग के गोले से पार कूदना, तलवारबाजी, आग के गोले से खेलना, मुंह से आग का गोला फेंकना आदि प्रमुख होते थे। इसके लिए लोग चार सप्ताह पहले से तैयारी शुरू कर लेते थे। व्यवसायी कैलाश पांडे बताते हैं कि डोले के आगे-आगे नगाड़े, निशाण, झोड़ा, चांचरी गाते लोकगायक, नृतकों की टीमें और पीछे अखाड़ा खेलती टीमें चलती थी। वह मानते हैं कि आज इस तरह की परंपराओं को जिंदा रखने के लिए युवाओं में उत्साह बढ़ाने की जरूरत है।नगर में स्व. दिलावर लाल, बदेशी, झब्बा लाल और राम प्रकाश आदि का नाम आज भी अच्छे अखाड़े बाजों में गिना जाता है। वाल्मीकि जयंती पर निकली शोभायात्रा
रानीखेत (अल्मोड़ा)। वाल्मीकि जयंती बुधवार को यहां धूमधाम से मनाई गई। इससे पूर्व मंगलवार रात शिव मंदिर, चौबटिया, माल रोड धर्मशालों में जयंती पर कई कार्यक्रम हुए। नेता प्रतिपक्ष की पत्नी पुष्पा भट्ट, पूर्व विधायक करन माहरा आदि ने भी शिरकत की। बुधवार की सुबह से ही नगर में तीनों स्थानों के लोगों ने भगवान वाल्मीकि की शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान शिव पार्वती नृत्य, मयूर नृत्य, अखाड़े का प्रदर्शन हुआ। समुदाय के लोगों ने सहयोग के लिए सभी का आभार जताया है।