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शिक्षण विधियों पर चर्चा कर बनाया पाठ्यक्रम

Mon, 08 Sep 2014 05:32 AM IST
Almora
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अल्मोड़ा। एसएसजे परिसर में शिक्षक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा कार्यशाला में छठे दिन गणित, हिंदी, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान विषयों की शिक्षण विधियों पर परिचर्चा कर पाठ्यक्रम बनाया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शिक्षक के प्रशिक्षण कौशल का विकास करने के लिए स्कूलों में आयोजित किया जाने वाला व्यवहारिक प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। इससे शिक्षक प्रशिक्षण द्वारा प्रभावी कौशल का समुचित विकास करने के लिए उसे निश्चित समयावधि तक स्कूलों में संबद्ध किया जाए। विषय विशेषज्ञ डायट के प्राचार्य डा. डीसी सती ने कहा कि यह पाठ्यक्रम राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ऐसे शिक्षक तैयार करने में सक्षम होगा, जो इन क्षेत्रों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूर्ण कर सकेंगे। इस मौके पर डा. हरेंद्र अधिकारी, प्रो. एनसी ढौंडियाल, प्रो. जीएस नयाल, प्रो. वीआर ढौंडियाल, प्रो. भीमा मनराल, डा. संगीता पवार, डा. रिजवाना सिद्दीकी, डा. मीना मनराल, डा. ममता असवाल, डा. भास्कर चौधरी, डा. नीलम कुमारी, डा. डीएस बिष्ट ने विचार रखे। कार्यशाला में ओमप्रकाश जोशी, राजेश पांडे, हेमंत कुमार बिनवाल, डा. रामकिशोर, नीरज कांडपाल, स्वाति जोशी, विपिन ढौंडियाल, मिर्जा नदीम बेग, डा. नीरज शुक्ला, गणेश चंद्र पंत, डा. सविता भंडारी, अशोक उप्रेती, गिरिजा रौतेला, नरेंद्र कुमार आर्या, भगवती प्रसाद पंत, धर्मवीर सिंह, डा. रंजना रुहेला, आसमा, सुनीता जोशी, महेश बहुगुणा, देवकी सिरौला, सुमन श्रेष्ठ आदि मौजूद थे।
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