रानीखेत। हजरत कालू सैयद बाबा की मजार पर उर्स की शुरुआत कवि सम्मेलन और मुशायरे के साथ हुई। कविताओं के माध्यम से कवियों ने जहां एकता और भाइचारे का संदेश दिया, वहीं उत्तराखंड आंदोलन से जुड़ी यादों को भी ताजा किया। नगर निवासी सतीश पांडे ने कहा कि ‘ओ निकले थे उर्स देखने, दिल में थे कुछ अरमान, एक तरफ थे हिंदू भाई दूसरी तरफ थे भाईजान’।
उर्स की पहली रात अल्मोड़ा से आए कवि नमन तिवारी ने बाबा कालू सैयद की याद में कहा कि ‘बड़ा ही खास मौका है कि इनायत हो गई, लो हमको कालू सैयद की जीरत हो गई’। ललित योगी ने कहा कि ‘चलती नहीं किसी की मुकद्दर के सामने, प्यासा खड़ा हुआ हूं समंदर के सामने’। कवि दिलशाद हुसैन ने कुछ यूं कहा ‘क्या हसीं लोग हैं, क्या हसीं रात है, कितनी प्यारी यह मुलाकात है’। दिनेश तिवारी ने जन कवि स्व. गिर्दा की याद में कविता सुनाई और उत्तराखंड आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों में जोश भरने वाली कविता ‘यारो मुछ्याव जगाओ’ सुनाई। कवि संजय रौतेला, डा. पूरन जोशी, मो. मोहसिन, रोजी अली खान, संदीप पाठक, हाजी अकबर हुसैन ने भी सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताएं सुनाईं । सम्मेलन का संचालन आदिल रामपुरी और राजेंद्र सिंह बिष्ट ने किया। उर्स समिति की ओर से स्व. विष्णु दत्त शर्मा की याद में कवियों को स्मृति चिह्न भी प्रदान किए गए। खादिम मो. मोहसिन ने सभी का आभार जताया।