धौलछीना। बाड़ेछीना-सेराघाट मार्ग खस्ताहाल है। कई स्थानों पर दीवारें क्षतिग्रस्त हैं, सड़क पर पहाड़ी से मलबा बहकर आ रहा है। सेराघाट मंदिर के निकट दो साल पहले अस्थायी पुल पर लगी टिन की चादरें उखड़कर खतरनाक बनी हुई हैं। अधिकारियों को कई बार जानकारी देने के बाद भी पुल की मरम्मत नहीं की जा रही है।
बाड़ेछीना-सेराघाट सड़क अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। 2010 की आपदा से सड़क को काफी नुकसान पहुंचा था। सेराघाट के निकट एक स्थान पर करीब 15 मीटर सड़क बह गई थी। तब इस सड़क में करीब 25 दिन तक यातायात ठप रहा। बाद में लोनिवि, एडीबी खंड ने इस स्थान पर अस्थायी वैली ब्रिज को किसी तरह दोनों तरफ चट्टानों में टिकाकर यातायात सुचारू किया था। इस पुल में लगी लोहे की चादरें अधिकांश स्थानों पर उखड़ गई हैं। पुल की चादरें वाहनों को क्षति पहुंचा रही हैं। भारी वाहनों के गुजरते समय पुल हिल रहा है। इससे कभी भी दुर्घटना हो सकती है। लोनिवि उखड़ी चादरों के ऊपर बार-बार मिट्टी डाल देता है लेकिन पुल ठीक करने के स्थाई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
यह सड़क दुर्घटना की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। एक दशक में इस सड़क में हुए सड़क हादसों में 111 लोग जान गंवा चुके हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। मुनस्यारी, चौकोड़ी, पाताल भुवनेश्वर, गंगोलीहाट आदि पर्यटक स्थलों के लिए यह मुख्य मार्ग है। मार्ग की दशा खराब होने से पर्यटकों, यात्रियों और माल वाहक वाहनों को काफी दिक्कतें हो रही हैं।