अल्मोड़ा। रबी की फसल बोने के बाद से बारिश नहीं हुई है। जिससे गेहूं, मसूर, जौ, चना, सरसों, लाही, मटर आदि की फसल जम नहीं पा रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि दस दिन के भीतर बारिश नहीं हुई तो असिंचित क्षेत्र में बोई गई फसल की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में काश्तकारों की आय का मुख्य साधन खेती है। जिले में रबी की फसल करीब 45 हजार हेक्टेयर में नवंबर के प्रारंभ में बोई गई थी। 38785 हेक्टेयर में गेहूं, 3972 हेक्टेयर में मसूर, 3250 में जौ, 900 में लाही और सरसों, 750 हेक्टेयर में चना और भट की फसल बोई गई है। फसल बोने के बाद से बारिश नहीं हुई है। जिससे गेहूं समेत अन्य फसलों का पूरा जमाव नहीं हो पाया है। इससे काश्तकार परेशान हैं। हालांकि पाला पड़ने से भूमि को थोड़ी नमी मिल रही है।
मुख्य कृषि अधिकारी डा. अभय सक्सेना ने बताया कि बुआई के बाद से अब तक फसल को असिंचित क्षेत्र में करीब 20 से 25 मिमी बारिश की आवश्यकता पड़ती है।
फसल का बीमा कराएं काश्तकार
अल्मोड़ा। मुख्य कृषि अधिकारी डा. अभय सक्सेना का कहना है कि काश्तकारों को विपरीत मौसम के चलते फसल का बीमा अवश्य कराना चाहिए। उन्होंने बताया कि करीब पांच नाली भूमि में बोई गई फसल के लिए काश्तकारों को 50 रुपये प्रीमियम देना होगा। ऋण लेकर फसल बोने वाले काश्तकार फरवरी तक और अन्य काश्तकार 31 दिसंबर तक फसल का बीमा करवाकर योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए काश्तकार बैंक शाखाओं और सहकारी समिति में संपर्क कर सकते हैं।