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Almora News: 94 फीसदी लोग आपदा और इसके खतरे के अंतर से अनजान... कैसे सुरक्षित रहेगी जान

Sat, 15 Nov 2025 11:48 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
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अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है लेकिन यहां आपदा से निपटने के लिए लोग अभी तक तैयार नहीं हैं। नगर में करीब 94 फीसदी लोग आपदा और इसके खतरे के अंतर से अनजान हैं। ऐसे हालात में आपदा आने पर यहां जनहानि बढ़ सकती है।
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सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शोधार्थी डॉ. पूरन जोशी के शोध में खुलासा हुआ कि नगर में ज्यादातर लोगों को भूस्खलन, भूकंप, आपदा प्रबंधन की जानकारी ही नहीं है। जो भविष्य में आपदा के जख्मों को और भी गहरा कर सकते हैं। अल्मोड़ा नगर में लगातार हो रहे अव्यवस्थित निर्माण और बढ़ती जनसंख्या के कारण आपदा का खतरा बढ़ गया है। हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते जलवायु परिवर्तन के कारण अल्मोड़ा में भूस्खलन, भूकंप, भारी बारिश से आपदा की घटनाएं बढ़ी हैं।
नगर के 13 वार्डों में 130 लोगों पर किया अध्ययन
एसएसजे विश्वविद्यालय के शोधार्थी डॉ. पूरन जोशी ने नगर के 13 वार्डों में 130 लोगों पर अध्ययन किया। शोध में पाया कि 33 लोग नहीं जानते कि आपदा क्या है, 123 लोग आपदा और आपदा के खतरे में अंतर नहीं जानते, 86 लोग इन आपदाओं को प्राकृतिक, 14 लोग इन्हें मानव निर्मित मानते हैं। 23 लोगों ने दोनों को आपदा का कारण बताया। 47 लोगों को नहीं पता कि आपदा प्रबंधन क्या है। 116 ने आपदा प्रबंधन का काेई प्रशिक्षण नहीं लिया था। 35 लोग को भूकंप के बारे में नहीं पता था। 84 लोगों ने नहीं पता कि जिले आपदा की दृष्टि से संवदेनशील क्षेत्र कौन से हैं। शोध में यह बात सामने आई कि नगर के लोगों को आपदा प्रबंधन के मूलभूत पहलुओं की कोई जानकारी नहीं हैं। इन परिस्थितियों में जिला प्रशासन के लिए नगर में आपदा की घटनाओं को रोकना चुनौती बन सकता है।
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आपदा के दृष्टि से नगर के संवेदनशील क्षेत्र
नगर के दुगालखोला, रेलापाली और राजपुरा पहले ही भूस्खलन और अन्य आपदाओं से प्रभावित हो चुके हैं। इन क्षेत्रों में निर्माण कार्य मानकों के मुताबिक नहीं होने से इन क्षेत्रों में आपदा का खतरा अधिक है।

1998, 2010, 2014 और 2019 में हुई थी भारी बारिश
जिले में वर्ष 1998, 2010, 2014 और 2019 में हुई भारी बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त- व्यस्त हो गया था। बारिश से भूस्खलन की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई, इससे कई लोग बेघर हुए। संवाद
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वर्ष 1992 से 2019 तक जिले में बारिश का ब्यौरा
वर्ष वर्षा (मिमी में)
1992 764
1993 1205
1994 1008
1995 889
1996 874
1997 1042
1998 1127
1999 683
2000 1185
2001 679
2002 803
2003 690
2004 996
2005 1307
2006 865
2007 1033
2008 920
2009 1178
2010 1505
2011 1230
2012 982
2013 972
2014 1282
2015 883
2016 974
2017 779
2018 654
2019 1140
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