अल्मोड़ा। उत्तराखंड पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डा. एसएस नेगी ने कहा कि पिछले दस वर्षो में पर्वतीय जिलों से अधिक पलायन हुआ है। अन्य जिलों की अपेक्षा पौड़ी और अल्मोड़ा जिले से सबसे अधिक पलायन हुआ है। विकास भवन सभागार में अधिकारियों की बैठक लेते हुए उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से पलायन के कारण व इसे रोकने के लिए सुझाव मांगे।
कृषि विभाग द्वारा बताया कि जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाना एक मुख्य समस्या है। विभिन्न विभागीय अधिकारियों द्वारा कहा गया कि पहाड़ में आवागमन की बड़ी समस्या है। इस कारण फसल, फलों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। पलायन का एक और कारण विपणन की समस्या है। जिस कारण किसान उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त करने से रह जाते हैं। पहाड़ से पलायन रोकने के लिए गुणवत्ता युक्त शिक्षा व्यवस्था, विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती, हिंदी, अंग्रेजी माध्यम से पठन-पाठन शुरू किए जाने पर जोर दिया गया। कहा गया कि पर्यटन सर्किट के रूप में अनछुए पर्यटक स्थलों को विकसित कर पर्यटन को बढ़ावा देकर पलायन को रोका जा सकता है।
नेगी ने कहा कि सभी विभागों के सुझावों तथा समस्याओं का विश्लेषण करने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। इस मौके पर अपर आयुक्त ग्राम्य विकास डॉ. आरएस पोखरिया, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास नरेश कुमार, जिला विकास अधिकारी केके पंत, पलायन आयोग के शोध अधिकारी जीबी चंद्रानी, गोविंद धामी, मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह आदि मौजूद थे।