अल्मोड़ा। नगर के लोअर मालरोड से धारानौला तक सुरंग बनाने का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। गत 24 जून को अल्मोड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुरंग निर्माण मामले में न तो कोई घोषणा की और न ही भाषणों में जिक्र किया है। जिससे सर्वे के बाद सुरंग बनाने का मामला आगे नहीं बढ़ पाया है।
शहर की सड़कों में वाहनों का काफी दबाव है। मालरोड से धारानौला तक आने-जाने में लोगों को वाहन से दस से बारह किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। करीब दो साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अल्मोड़ा में सुरंग निर्माण की घोषणा की थी। इसके सर्वे के लिए कांग्रेस सरकार ने लोनिवि को 50 लाख रुपये जारी किए थे। तत्पश्चात लोनिवि प्रांतीय खंड ने सुरंग निर्माण की संभावना जांचने का काम गुड़गांव की कंपनी एमबर्ग इंजीनियरिंग से करवाया।
कंपनी ने सुरंग निर्माण के लिए फिजिविलिटी परीक्षण किया और लोअर मालरोड से सिकुड़ा बैंड तक कुरंग निर्माण को उपयुक्त पाया है। कंपनी ने गतवर्ष रिपोर्ट लोनिवि को सौंप दी थी। इसके बाद लोनिवि ने रिपोर्ट शासन को भेजी। प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने और कांग्रेस के सत्ता से हटने के बाद मामला ठंडे बस्ते में है। लोगों को आशा थी कि प्रदेश में सत्ता संभालने के बाद भाजपा सुरंग निर्माण के मामले को आगे बढ़ाएगी। पिछले माह 24 जून को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पहली बार अल्मोड़ा पहुंचे थे। लोगों को आशा थी कि वह अन्य विकास कार्यों के साथ ही सुरंग निर्माण के लिए भी बजट मंजूर करेंगे। न तो किसी स्थानीय जनप्रतिनिधि ने सुरंग निर्माण का मुद्दा मुख्यमंत्री के सम्मुख रखा और न ही सीएम के भाषणों में सुरंग निर्माण का मुद्दा आया, जिससे सुरंग निर्माण का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है।