अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर उत्तराखंडी अस्मिता को ध्वस्त करते भू माफिया विषय पर हुई संगोष्ठी में वक्ताओं ने सरकार से जमींदारी विकास अधिनियम में किए गए संशोधनों को वापस लेने की मांग की। एक होटल में हुई संगोष्ठी में राज्य के आंदोलनकारियों, राजनीतिक, सामाजिक संगठनों से इस सवाल पर अपनी राय सार्वजनिक करने की भी अपील की गई।
संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि जिस तरह राज्य बनने के बाद उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों, विशेषकर जमीनों की बंदरबांट हुई है और उत्तराखंड सरकार ने पिछले विधानसभा सत्र में औद्योगीकरण के नाम पर कृषि भूमि खरीदने की छूट दी है, उसके परिणाम पर विचार की आवश्यकता है। पहरू पत्रिका के संपादक हयात सिंह रावत ने सरकार पर जानबूझ कर भूमि बंदोबस्त नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चकबंदी नहीं होने से कृषि भूमि लगातार कम हुई है।
सामाजिक कार्यकर्ता राजू महर ने कहा कि जमीनों को लेकर राज्य के तराई में बड़े-बड़े घोटाले सत्ता के संरक्षण में हुए हैं। संगोष्ठी में ईश्वरी दत्त जोशी, वन पंचायत सरपंच संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह मेहरा, डॉ. केएस रावत, रोहित जोशी, भावना पांडे, प्रकाश उनियाल, गिरधारी कांडपाल, आनंदी वर्मा, रेखा धस्माना, रेशमा परवीन ने भी विचार रखे। इस दौरान धीरेंद्र मोहन पंत, मनोज पंत, हेमंत भट्ट, रमा शंकर नैनवाल, विमला, गोपाल राम, राजू गिरी, वसीम, स्निग्धा तिवारी, जन्मेजय, ललित भट्ट, मोहन भट्ट आदि तमाम कार्यकर्ता मौजूद थे।