अल्मोड़ा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राजकीय इंटर कालेज बाड़ेछीना में आयोजित जागरूकता शिविर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनमोहन सिंह ने कहा कि बच्चे अत्यंत संवेदनशील और भावुक होते हैं। बच्चों को उनकी वास्तविक आवश्यकताओं से उपेक्षित करना और उनको खतरनाक स्थिति में रखना दुर्व्यवहार की श्रेणी में आता है। बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए उन्हें अच्छी खाद्य सामग्री दी जाए।
उन्होंने बताया कि शारीरिक दुर्व्यवहार के अंतर्गत बच्चों को मारना पीटना, परेशान करना आदि आता है। उन्होंने लैंगिक रूप से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 21 की जानकारी दी। संचालन करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव शेष चंद्र ने कहा कि पॉक्सो एक्ट नाबालिग बालक-बालिकाओं को उनके खिलाफ होने वाले लैंगिक अपराधों से निपटने का एक हथियार है।
उन्होंने शिक्षा का अधिकार कानून संबंधी जानकारी भी दी। प्रधानाचार्य गिरीश चंद्र टम्टा ने शिक्षक वर्ग से लैंगिक अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। शिविर में जीआईसी पेटशाल, बाड़ेछीना, बरे और अन्य विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया। इस मौके पर प्रतिभागियों को सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकें वितरित की गई।