रानीखेत (अल्मोड़ा)। छावनी परिषद को न तो स्कूली बच्चों की चिंता है और ना ही पर्यटकों की फिक्र। यहां ब्रिटिशकालीन रानीझील सड़क बदहाली के दौर से गुजर रही है। अधिकांश निजी विद्यालय इसी सड़क से लगे हुए हैं, बच्चे वाहनों में हिचकोले खाते हुए स्कूल पहुंचने को विवश हैं, दूसरी तरफ रानीझील पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र है। झील को देखने के लिए काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन बदहाल सड़क को देखकर वह लोग कड़वे अनुभव लेकर लौटते हैं।
रानीखेत की सुरम्य वादियों के बीच अंग्रेजों ने जंगल के बीच से होकर सड़क बनाई थी। शांत वादियों का लुत्फ उठाने के लिए भारी संख्या में लोग इस सड़क से पैदल सैर करते हैं। रानीझील भी इसी सड़क पर स्थित हैं, लेकिन मार्ग की हालत लंबे समय से बदहाल है।
जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं, इस सड़क से होकर ही विद्यालयों के बच्चे वाहनों से गुजरते हैं और गड्ढों में हिचकोले खाते हुए स्कूल से आते-जाते हैं। पूर्व में कई बार खबर प्रकाशित करने के बावजूद इस सड़क को ठीक नहीं किया जा रहा है। सड़क के रख रखाव का जिम्मा छावनी परिषद के पर है।
स्थानीय नागरिक भी कई बार सड़क दशा सुधारने की मांग कर चुके हैं। इन दिनों पर्यटन सीजन चरम पर है। सैलानी भारी संख्या में रानीझील के दीदार को पहुंच रहे हैं। लोगों का कहना है कि सैलानी ठंडी वादियों को अधिक पसंद करते हैं, ऐसे में सड़क खराब होने के कारण वह लोग कड़वे अनुभव लेकर जाते हैं।