अल्मोड़ा। जिले में थ्रंबोप्लास्टिन पदार्थ की कमी से होने वाले हीमोफीलिया रोग का उपचार शुरू हो गया है। बेस अस्पताल में इस रोग के उपचार के लिए इंजेक्शन आ चुके हैं। जिसके बाद दो मरीजों को उपचार भी देना शुरू कर दिया गया है। इधर जिले में एक और व्यक्ति हीमोफीलिया से पीड़ित मिला है। इसके बाद जिले में इस रोग के पीड़ितों की संख्या चार हो गई है।
20 अप्रैल को अमर उजाला में अब अल्मोड़ा में हो जाएगा हीमोफीलिया रोग का उपचार खबर प्रमुखता से छपी थी। यह रोग होने पर मनुष्य के शरीर में खून का थक्का नहीं बन पाता है और शरीर के किसी भी अंग में चोट लगने या कटने पर बहने वाला खून रुकता नहीं है।
बाजार में हीमोफीलिया के उपचार के लिए दिया जाने वाला इंजेक्शन काफी महंगा होता है। इसलिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इस रोग से पीड़ित व्यक्तियों को निशुल्क इंजेक्शन लगाने की योजना तैयार की गई थी। बेस अस्पताल में इस रोग से पीड़ित व्यक्तियों के उपचार की व्यवस्था अब हो गई है।
इसके लिए हीमोफीलिया पीड़ित व्यक्तियों को स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर 104 में पंजीकरण कराना होता है। सत्यापन के बाद मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाता है। अभी तक भिकियासैंण में एक और धौलादेवी ब्लॉक में दो मरीज इस रोग ोसे पीड़ित मिले थे, लेकिन इधर पनुवानौला में सरकारी विभाग में सेवारत एक अन्य महिला भी हीमोफीलिया की रोगी मिली है। जिसका पंजीकरण होने के बाद इलाज शुरू हो गया है।
एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक दीपक भट्ट ने बताया कि बेस में 40 इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए गए हैं और मरीजों का उपचार भी शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक इस बीमारी के इलाज के लिए लोगों को हल्द्वानी या कोटद्वार जाना पड़ रहा था, लेकिन अब पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत आदि जिलों के मरीज यहां आकर इलाज करवा सकते हैं।