अल्मोड़ा। भारत बंद के दौरान सामान्य वर्ग के तीन लोगों के खिलाफ पुलिस द्वारा शांति भंग के आरोप में धारा 107/16 के तहत चालान की कार्रवाई करने पर सामान्य वर्ग संघर्ष समिति ने रोष जताया है। समिति ने इसकी निंदा करते हुए जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में बिना शर्त दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की है। समिति ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई को सामान्य वर्ग की आवाज को दबाने का प्रयास बताते हुए आंदोलन की धमकी दी है।
ज्ञापन में कहा गया है कि कि सुप्रीम कोर्ट ने एएसटी-एसटी कानून में संशोधन कर सामान्य वर्ग को राहत दी है। 10 अप्रैल को सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के पक्ष में भारत बंद का आह्वान किया गया था। अल्मोड़ा शहर के व्यापारियों ने स्वेच्छा से बंद का समर्थन किया और अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। इस दौरान कहीं भी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और बंद शांतिपूर्ण रहा। आरोप लगाया है कि पुलिस द्वारा सामान्य वर्ग की आवाज को दबाने के लिए फर्जी तौर पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए गए।
समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच कर मुकदमे बिना शर्त वापस लेने की मांग की है अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी है। ज्ञापन देने वालों में अजीत सिंह कार्की, विनीत बिष्ट, प्रकाश कार्की ललित लटवाल, ललित बिष्ट, वैभव पांडे, कमल कोरंगा, हरीश पांडे, पंकज जीना, सुशील साह, मनीष जोशी आदि शामिल हैं।