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पहाड़ी जिलों में रुला रहीं बीएसएनएल की सेवाएं

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अल्मोड़ा। अल्मोड़ा समेत, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत के ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या काफी ज्यादा है। सिग्नल की समस्या या फिर फोन बार-बार कट जाने की समस्या इन जिलों में आम हो गई है। लोगों को अपनों से बात करने के लिए सिग्नल वाली जगहों में जाना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर इंटरनेट का प्रयोग करने वालों की तादात भी काफी कम है। अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत और बागेश्वर जिले की बात करें तो चारों जिलों में लगभग 5800 ही इंटरनेट यूजर हैं वो भी शहरी क्षेत्र में।
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13 लाख की आबादी वाले चार जिलों में बीएसएनएल के करीब ढाई लाख उपभोक्ता हैं। अक्सर लोगों के फोन नहीं मिल पाते हैं या फिर उन्हें बात करने के लिए सिग्नल वाली जगहों में जाना मजबूरी बना हुआ है। अचानक फोन में सिग्नल गायब हो जाते हैं तो कई बार सिग्नल होने के बावजूद फोन की रिंग नहीं आती है। करीब एक माह से यह समस्या बरकरार है। कहीं फाइबर कटने की खबर तो कहीं सिग्नल जाम की समस्या बनी रहती है।

रानीखेत में लैंडलाइन और इंटरनेट सेवा पांच दिन से खराब है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सुधार कर लिया गया है। दूसरी ओर इंटरनेट सेवा की बात करें तो इंटरनेट यूज करने वाले केवल शहरी उपभोक्ता हैं। उनकी भी संख्या मात्र 5800 है।
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इतनी आबादी होने के बावजूद ग्रामीण इलाके इंटरनेट सुविधा से नहीं जुड़ सके हैं। वर्तमान में चार जिलों में केवल 19 ग्राम पंचायतों ने ही इंटरनेट की मांग की है। मांग करने वाली सभी ग्राम पंचायतें केवल बागेश्वर जिले की हैं। हालांकि बीएसएनएल ने भारत नेट के तहत 400 गांवों में आप्टिकल फाइबर लगा दिए हैं और जो भी ग्राम पंचायत ब्रॉडबैंड की मांग कर रही है, वहां कनेक्शन दिए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं का मानना है कि बीएसएनएल में सुधार की काफी जरूरत है।

बीएसएनएल के महाप्रबंधक अनिल गुप्ता ने बताया कि आप्टिकल फाइबर में दिक्कत या फिर ज्यादा समय तक बिजली जाने और टावर बंद होने की वजह से फोन में कभी-कभी यह दिक्कत होती है। चारों जिलों में अभी 240 बीटीएस लगे हैं और 50 बीटीएस लगाए जाने हैं। बजट आने के बाद ही बीटीएस लगाए जा सकेंगे।
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