चौखुटिया (अल्मोड़ा)। बमनगांव की गीता जोशी को भरसक प्रयास के बावजूद अपनी सास गोविंदी देवी को न बचा पाने का अफसोस है। गीता ने अदम्य साहस का परिचय देकर अपनी सास को तेंदुए का निवाला बनने से तो बचा लिया पर उनकी जान नही बचा पाई। इस घटना के बाद से गमगीन गीता ने अभी खाना नहीं खाया है।
ग्राम पंचायत बमनगांव में रविवार की देर रात जिस समय तेंदुए ने गोविंदी देवी (70) को घर की चौखट से खींचा तब उनकी बहु गीता जोशी गोशाला से लौटी थी। वह कुछ समझ पाती की घात लगाकर बैठा तेंदुआ उनकी सास को खींचकर घर से नीचे की तरफ ले जाने लगा। उसके पीछे भागी गीता ने तीन खेत नीचे जाने के बाद अपनी सास के दोनों पांव पकड़कर अपनी ओर खींचे, परंतु तेंदुआ उसकी सास को दो खेत और नीचे ले गया। इस दौरान गीता द्वारा शोर मचाने पर वह उसे वहीं छोड़ गया। लोग जब तक पहुंच पाते तब तक गोविंदी की मौत हो चुकी थी। गीता सोमवार को पूरे दिन गमगीन होकर खामोश रही। इस दौरान उसने गांव की प्रधान राधिका देवी तथा अपनी कुछ खास महिला साथियों को घटनाक्रम के बारे में बताया। गीता के इस साहस को काफी सराहा जा रहा है।