सोमश्वर (अल्मोड़ा)। सोमेश्वर घाटी क्षेत्र के गांवों में बंदरों और जंगली सुअरों ने खेतों में बोई गई फसल चौपट कर दी है। रात्रि में सुअरों के झुंड फसल खोद दे रहे हैं। ग्रामीणों ने सरकार से जंगली सुअरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।
सोमेश्वर घाटी क्षेत्र में काश्तकारों की आजीविका का प्रमुख साधन खेती है।
काश्तकारों ने इन दिनों खेतों में धान, मडुवा, गहत, मास, भट, मक्का, गडेरी, पिनालु समेत अन्य फसलें बोई हैं। दिन में जहां बंदर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं रात को सुअरों के झुंड क्षेत्र काश्तकारों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। सुअर खेतों में बोई गई फसल को खोद दे रहे हैं। घाटी के नारंगतोली, रौतेलागांव, अर्जुनराठ, मल्लाखोली, भानाराठ, रतुराठ, दलमोड़ी, भंडारीगांव, टाना, पल्यूड़ा, हट्यूड़ा, रैत, सर्प, खाड़ीसुनार, जालदौलाड़, अधूरिया, चनौदा, बैगनियां, झुपुलचौरा आदि गांवों में बंदरों और सुअरों ने काश्तकारों की फसल चौपट कर दी है।
ग्राम पंचायत मल्लाखोली की प्रधान शांति देवी का कहना है कि ग्रामीण खेती में काफी मेहनत करते हैं, लेकिन जंगली जानवर फसल को चौपट कर दे रहे हैं। अर्जुनराठ गांव के शिवेंद्र बोरा का कहना है कि सरकारें घोषणा करती हैं पर समस्या का समाधान नहीं कर पाती हैं। बंदरों से खेती के साथ ही बच्चों को भी खतरा बना हुआ है। सरकार को इसका समाधान निकालना चाहिए।