भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। राजकीय एलोपैथिक अस्पताल चनोली शोपीस बनकर रह गया है। अस्पताल में डॉक्टर, फार्मेसिस्ट के पद लंबे समय से खाली हैं। दूसरे अस्पताल से सप्ताह में दो दिन फार्मेसिस्ट यहां आकर रोगियों को उपचार देते हैं।
तहसील स्याल्दे के दूरस्थ चनोली में एलोपैथिक अस्पताल की स्थापना 1975 में हुई। अस्पताल में डॉक्टर सहित फार्मेसिस्ट के पद सृजित हैं, लेकिन लंबे समय से यह पद खाली हैं। विभाग ने व्यवस्था के तहत राजकीय अस्पताल चित्तौड़खाल में तैनात फार्मेसिस्ट की सप्ताह में दो दिन यहां ड्यूटी लगाई है। वर्तमान में चनौली अस्पताल में एएनएम, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही तैनात हैं, जिससे चनौली क्षेत्र से जुड़े दस से अधिक गांवों के लोगों को सात किमी दूर सुरईखेत प्राथमिक उपचार के लिए जाना पड़ता है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता सुनील टम्टा ने सरकार से अस्पताल में शीघ्र रिक्त डॉक्टर, फार्मेसिस्ट के पद पर नियुक्ति कर सभी आवश्यक सुविधा मुहैया कराने की मांग की है
अस्पताल के बोर्ड में विकासखंड का नाम लिखा गलत
भिकियासैंण। राजकीय एलोपैथिक अस्पताल चनोली के भवन पर लगे बोर्ड पर विकासखंड देघाट लिखा है जबकि यह अस्पताल विकासखंड स्याल्दे के अंतर्गत आता है, लेकिन विभागीय अधिकारी लंबे समय बाद भी इस बोर्ड पर विकासखंड का नाम सही नहीं करा पाए हैं।