अल्मोड़ा। अखिल भारतीय किसान सभा, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) जिला कमेटी के सदस्यों ने गरीब किसानों, खेती श्रमिकों का सरकारी, निजी ऋण माफ करने की मांग की है। उन्होंने विभिन्न मांगों को लेकर डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने कहा कि किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए।
ज्ञापन में कहा है कि कांग्रेस द्वारा शुरू की गई विनाशकारी आर्थिक नीतियों का भाजपा पिछले चुनाव से पूर्व विरोध कर रही थी लेकिन सरकार अब उन्हीं नीतियों को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रक्षा संस्थानों, रेलवे का निजीकरण कर सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को निजी हाथों में बेचा जा रहा है। आंगनबाड़ी, आशाओं तथा भोजन माताओं का पिछले तीन वर्षों में बजट काटा जा रहा है। 45वें श्रम सम्मेलन के पारित प्रस्ताव को लागू नहीं किए जा रहे हैं। किसानों की खाद, बीज, कृषि रक्षक दवाओं में आई बढ़ोतरी के चलते उत्पादन लागत बढ़ गई है। कृषि उपज के लाभकारी दाम न मिलने, स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू न करने से किसान कर्ज के मकड़जाल में फंसकर हताशा में आत्म हत्याएं कर रहे हैं। निजी कंपनियों के कामगारों को जीवनयापन लायक वेतन नहीं मिल रहा है। सरकारी, निजी सभी क्षेत्रों में कार्यरत कामगारों को न्यूनतम 18 हजार रुपये मजदूरी दी जाए। उन्होंने श्रमिकों के लिए व्यापक कानून बनाने, मनरेगा का ग्रामीण क्षेत्रों में सही ढंग से क्रियान्वयन करने, मनरेगा का शहरी क्षेत्रों तक विस्तार करने, सबके लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, रक्षा संस्थानों, रेलवे का निजीकरण बंद करने, सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का एनपीए वसूल करने, मिलों, सरकारी अस्पतालों को पीपीपी मोड से हटाने, महंगाई पर रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में सीटू के आरपी जोशी, किसान सभा के दिनेश पांडे, डुंगर सिंह भाकुनी, बच्ची सिंह मेहता, नवीन राम, मोहन पांडे, शिवराज सिंह, नंदाबल्लभ जोशी, शंकर लाल, किशन सिंह भंडारी, ललित मोहन, गोपाल सिंह, ऊर्बा दत्त, अरुण जोशी आदि शामिल हैं।