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फलों के संरक्षण में अह्म भूमिका निभा रहा फल संरक्षण केंद्र

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अल्मोड़ा। उद्यान विभाग का अल्मोड़ा स्थित राजकीय फल संरक्षण केंद्र फलों के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है। केंद्र में आजीविका सुधार को स्क्वैश, जूस, अचार, मुरब्बा, जैम, जेली बनाने का प्रशिक्षण लोगों को दिया जाता है। वहीं कच्चा माल उपलब्ध कराने पर केंद्र में उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
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1954 में अल्मोड़ा में उद्यान विभाग के अधीन राजकीय फल संरक्षण केंद्र स्थापित हुआ। केंद्र में जूस, स्क्वैश, मुरब्बा, अचार, जैम, जेली आदि तैयार किए जाते हैं। इसके लिए लोगों को फलों पर आधारित उत्पाद बनाने के लिए कच्चा माल केंद्र को उपलब्ध कराना होता है। केंद्र में कार्यरत कार्मिक फलों के उत्पाद तैयार करते हैं। इसके लिए विभाग प्रति किलो और लीटर उत्पाद के लिए सामुदायिक शुल्क, रंग, रसायन शुल्क के रूप में 15 से 20 रुपये लेता है।

केंद्र में माल्टा, नीबू, बुरांश, आम, आंवला, सेब, नाशपाती, खुमानी के फूलों से विभिन्न उत्पाद बनाए जाते हैं। फल संरक्षण केंद्र के माध्यम से इच्छुक लोगों को फलों से निर्मित उत्पादों के लिए ग्रामीण क्षेत्र में दस दिन और शहरी क्षेत्र में 15 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
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पिछले वर्ष 409 लोग प्रशिक्षित किए गए, जो अब स्वयं का रोजगार भी चलाते हैं।
केंद्र के प्रभारी केएस बिष्ट ने बताया कि प्रतिवर्ष करीब दो से ढाई हजार लोग केंद्र में स्क्वैश, जूस, अचार, मुरब्बा, जैम, जेली बनवाते हैं। केंद्र मेें प्रतिवर्ष लगभग तीन हजार किलो जूस, स्क्वैश के अलावा अचार, मुरब्बा, जैम, जेली आदि बनाई जाती है।
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