मानिला (अल्मोड़ा)। तल्ला मानिला स्थित पौराणिक देवी मंदिर में आयोजित स्याल्दे मेले में कलाकारों ने एक मंच पर कुमाऊंनी और गढ़वाली लोक संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों की वाहवाही बटोरी।
मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त मुख्य वन संरक्षक बाला दत्त कांडपाल ने कहा कि मेले लोक संस्कृति की पहचान है। इस तरह के मेलों में नवोदित कलाकारों को आगे बढ़ने का बेहतर मंच मिलता है।
उन्होंने मेले के शानदार आयोजन के लिए मेला प्रबंधन समिति के प्रयासों की सराहना की। मेले में जै नंदा लोक कला केंद्र अल्मोड़ा के कलाकारों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किए। लता पांडे ने स्याल्दे कौतिक लागी रो मेरो मानिला डाणा मां... कुमाऊंनी गाना पेश किया।
हास्य कलाकार प्रताप शाही टाइगर ने पहाड़ से हो रहे पलायन, शराब के बढ़ते प्रचलन और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर हास्य कविता सुनाकर लोगों को हंसने को मजबूर कर दिया। गायक राजेंद्र सिंह ने मेरी घरवाइ त्यर म्यर लंब दगरो.. गाना पेश किया। इससे पूर्व विभिन्न गांवों के ग्रामीण ढोल नगाड़ों के साथ मंदिर में पहुंचे। उन्होंने मंदिर की परिक्रमा कर देवी माता से आशीर्वाद लिया।
मेले में चौना, टिटोली, सकनणा, सिमली, कुन्हील, गहणा, नैलवालपाली, कनगड़ी, क्वैरला, डभरा, बीछखोली, सीमा रिसकना, नकतूरा, डोटियाल समेत आसपास के कई गांवों से काफी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। मेला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह मनराल ने सभी का आभार जताया। अध्यक्षता दया राम नैलवाल तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन भैरव दत्त लखचौरा ने किया।