गौना गांव के एक ग्रामीण के नाम से किसी दूसरे व्यक्ति ने जिला सहकारी बैंक लमगड़ा शाखा से 50 हजार रुपये का ऋण ले लिया। जब बैंक से नोटिस आया तो ग्रामीण को इसकी जानकारी मिली। मामले के तूल पकड़ने पर संबंधित लोगों ने पिछले दिनों आनन-फानन में ऋण की राशि बैंक में जमा कर दी। पीड़ित ने इसके लिए तत्कालीन बैंक कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जांच की मांग को लेकर लमगड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने धारा 420, 468 में मुकदमा दर्ज कर ऋण से संबंधित कागजात सीज कर दिए दिए हैं।
गौना गांव के ग्रामीण जोगा राम आर्य पुत्र देव राम ने प्राथमिकी में कहा है कि जिला सहकारी बैंक लमगड़ा ने अक्तूबर 2009 में दुकान व्यवसाय के लिए उसे 50 हजार रुपये का कर्जदार बनाया है, जबकि न तो कागजातों में उसके हस्ताक्षर हैं और न ही फोटो पहचान पत्र है। न ही उसे ऋण का धन मिला। आरोप लगाया है कि तत्कालीन बैंक कर्मियों ने दो महिला गवाहों के नाम भी फर्जी अंकित कर दिए। जब नोटिस आया तो उसे इसकी जानकारी मिली। जब इस बारे उसने बैंक से जानकारी चाही तो बैंक कर्मी का कहना था कि कुछ दिन पहले धन गवाहों ने जमा कर दिया है।
जोगा राम का कहना है कि ऋण किसने लिया, गवाह कौन थे इसकी उसे कोई जानकारी नहीं है। जोगा राम ने इस मामले में बैंक कर्मियों की भी मिलीभगत की आशंका जताई है। उसका कहना है कि इस घटना से उसका मानसिक उत्पीड़न हुआ है। जोगा राम की तहरीर पर लमगड़ा पुलिस ने धारा 420, 468 में मामला दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष श्याम सिंह रावत ने बताया कि जांच की जा रही है। बैंक में ऋण से संबंधित पत्रावली सीज कर दी गई है। जल्द जांच पूरी कर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।