भूगर्भ वैज्ञानिक भी इसे घोषित कर चुके हैं आपदा क्षेत्र
दूसरा मकान बनाने के लिए ग्रामीणों के पास नहीं है पैसा
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। भैंसियाछाना ब्लॉक के बुढ़ाधार तोक के करीब 50 परिवार 14 वर्ष से आपदा में क्षतिग्रस्त हुए मकानों के मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
वर्ष 2010 में बुढ़ाधार तोक में भूस्खलन से 10 से अधिक मकानों की छतों और दीवारों में दरारें पड़ गईं थीं। ग्रामीणों को जान बचाने के लिए रिश्तेदारों के घरों में शरण लेनी पड़ी थी। भूगर्भ वैज्ञानिकों की टीम तोक की जमीन को धंसने वाली बताकर इसे आपदा क्षेत्र घोषित कर चुकी है।
वर्तमान में यहां 65 में से 50 मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं। अपनी सुरक्षित भूमि पर नया घर बनाने के लिए पीड़ित परिवारों के पास पैसा नहीं है। ऐसे में 360 की आबादी के लिए क्षतिग्रस्त मकानों में रहना मजबूरी है।
अब तक नहीं हटाया जा सका मलबा
2010 में तोक के कई मकानों में मलबा घुस गया था। रास्ते भी मलबे से पट गए थे। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से घरों में घुसे मलबे को तो हटा दिया लेकिन रास्तों पर मलबा जस का तस है।
बारिश होते ही सहम जाते हैं ग्रामीण
ग्रामीणों के मुताबिक घरों की छतों और दीवारों की दरारें समय के साथ बढ़ती जा रही हैं। हल्की बारिश में भी छतों से पानी टपकने लगता है। लोग पानी टपकने वाली जगह पर बाल्टियां लगा कर बारिश के बंद होने का इंतजार करते हैं। वे थोड़ी सी बारिश होने पर भी सहम जाते हैं।
बोले लोग
आपदा के कारण मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं। इनमें रहना सुरक्षित नहीं है। प्रशासन को जल्द मुआवजा देना चाहिए। - संतोष राम, मंडल अध्यक्ष, भाजपा अनु. जाति मोर्चा।
- समय बढ़ने के साथ-साथ मकानों की दरारें भी बढ़ती जा रही हैं। लोग जान जोखिम में डालकर इनमें रह रहे हैं, जहां हमेशा अनहोनी की आशंका रहती है। - जगदीश प्रसाद, ग्रामीण।
-हर साल किसी न किसी मकान में दरारें पड़ जाती हैं। पीडि़त परिवार लंबे समय से मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं लेकिन 14 साल में किसी को मुआवजा नहीं मिल सका है। - मनोज कुमार, ग्रामीण।
- आपदा के बाद से डर के साए में जी रहे हैं। क्षतिग्रस्त भवनों के कारण हादसे की आशंका रहती है। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए। - सुरेश राम, ग्रामीण।
- जब से मकानों को नुकसान पहुंचा है, तब से वे इन्हें
छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना चाहते हैं लेकिन दूसरा मकान बनाने के लिए पैसे नहीं है। मुआवजा मिले तो फिर कुछ सोचें।- अशोक प्रसाद, ग्रामीण।
कोट- टीम गठित कर भूस्खलन की जद में आए गांवों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित लोगों की जल्द मदद की जाएगी। -आलोक कुमार पांडेय, डीएम, अल्मोड़ा
फोटो - 01 एलएमए 25 पी- आपदा में क्षतिग्रस्त बुढ़ाधार तोक का भवन। संवाद
फोटो - 01 एलएमए 26 पी- तोक के रास्तों पर पड़ा मलबे का ढ़ेर। संवाद
फोटो - 01 एलएमए 27 पी- संतोष राम, मंडल अध्यक्ष, भाजपा अनु. जाति मोर्च।
फोटो - 01 एलएमए 28 पी- जगदीश प्रसाद, ग्रामीण।
फोटो - 01 एलएमए 29 पी- मनोज कुमार, ग्रामीण।
फोटो - 01 एलएमए 30 पी- सुरेश राम, ग्रामीण।
फोटो - 01 एलएमए 31 पी- अशोक प्रसाद, ग्रामीण।
फोटो - 01 एलएमए 32 पी- आपदा के कारण बुढ़ाधार तोक के भवन पर पड़ी दरार। संवाद