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आल्पस फैक्ट्री के एक भवन सहित पांच नाली भूमि पर प्रशासन ने लिया कब्जा

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अल्मोड़ा। उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने यहां पातालदेवी में स्थित आल्पस फैक्ट्री की पांच नाली सरकारी भूमि सहित फैक्ट्री के एक भवन में ताला डालकर उसे अपने कब्जे में ले लिया है। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि हाइकोर्ट के आदेश पर यह संपत्ति फिलहाल राज्य सरकार के कब्जे में आ गई है।

जानकारी के मुताबिक पातालदेवी में स्थित आल्पस फार्मास्यूटिकल्स दवा कंपनी के प्रबंधन से जुड़े रहे केसी जोशी और जयेश शुक्ला आदि के बीच फैक्ट्री के स्वामित्व सहित कुछ अन्य मामलों को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है। इससे जुड़े मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही है। हाइकोर्ट ने आल्पस फैक्ट्री को सरकार की ओर से आवंटित पांच नाली जमीन का कब्जा सरकार के पक्ष में करने के आदेश दिए हैं। इसी के अनुपालन में बृहस्पतिवार से पैमाइश की जा रही थी। शुक्रवार को एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, उद्योग केंद्र के जीएम दीपक मुरारी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी आशा पुरोहित, तहसीलदार संजय कुमार आदि ने मौके पर पहुंचकर इस उद्योग को सरकार की ओर से आवंटित की गई पांच नाली भूमि पर कब्जा ले लिया।
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एसडीएम सीमा विश्वकर्मा ने बताया कि इस भूमि पर स्थित फैक्ट्री के एक भवन पर भी ताला लगाकर चाबी मालखाने में जमा कर दी गई है। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि हाईकोर्ट ने फिलहाल राज्य सरकार की पांच नाली जमीन पर कब्जा लेने के निर्देश दिए हैं, जबकि लगभग इतनी ही भूमि जिला उद्योग केंद्र की है। जिला उद्योग केंद्र की जमीन के बारे में फिलहाल यथास्थिति बनी हुई है।
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सात माह से बंद पड़ी प्रसिद्ध दवा कंपनी के भविष्य पर असमंजस बरकरार
अल्मोड़ा। करीब सात माह से बंद आल्पस दवा फैक्ट्री को चालू करने के लिए कर्मचारी आंदोलनरत हैं लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद फैक्ट्री के भविष्य को लेकर असमंजस और गहरा गया है। उल्लेखनीय है कि अल्मोड़ा की आल्पस दवा कंपनी की स्थापना 1974-75 में हुई। स्थानीय व्यवसायी खजान जोशी ने 2005 तक इस कंपनी को खुद संचालित किया। 2005 में उन्होंने इस कंपनी के शेयर गुजरात के व्यवसायी जयेश के. शुक्ला को बेच दिए और कंपनी का स्वामित्व मुख्य रूप से जयेश के. शुक्ला के पास आ गया। बताया गया है कि जयेश शुक्ला ने इस फैक्ट्री को संचालित करने के लिए देना बैंक गांधीनगर (गुजरात) से करोड़ों का ऋण लिया था, जिसकी देनदारी काफी अधिक हो गई है। कुछ साल तक कंपनी ने अच्छा कारोबार किया लेकिन पिछले कुछ समय से कंपनी की हालत खराब होती चली गई और कई महीनों से जयेश शुक्ला का भी कोई पता नहीं है।
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