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ग्लूकोमा का समय पर उपचार नहीं होने पर जा सकती हैं आंखों की रोशनी

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अल्मोड़ा। विश्व ग्लूकोमा निवारण सप्ताह के तहत राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ कार्यालय में हुई गोष्ठी में मुख्य वक्ता पूर्व निदेशक डा. जेसी दुर्गापाल ने कहा कि ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) आंखों की एक गंभीर बीमारी है। जिसमें आंख के भीतर तरल पदार्थ का दबाव बढ़ जाता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर रोगी दृष्टिहीन हो सकता है।

उन्होंने बताया कि ज्यादा देर तक कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल पर काम करते हुए आंखों पर बहुत दबाव पड़ता है। जिससे आंख से मस्तिष्क तक संदेश ले जाने वाली आप्टिक नर्व क्षतिग्रस्त हो जाती है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन का हवाला देते हुए बताया कि जितने लोग अपनी आंखों की रोशनी को खोते है उसकी सबसे बड़ी वजह ग्लूकोमा ही होता है।
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विश्व में ग्लूकोमा से पीड़ित लोगों की संख्या करीब छह करोड़ 50 लाख है। जिसमें से एक करोड़ 20 लाख लोग सिर्फ भारत में ही हैं। अध्यक्षता संघ के उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह अधिकारी तथा संचालन डीके जोशी ने किया। गोष्ठी में श्याम नारायण, जीसी जोशी, किरन शाह, स्वाति तिवारी, मंजू कबडोला, पूजा रावत, रश्मि डसीला, कंचन भंडारी आदि मौजूद थे। ब्यूरो
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