रानीखेत (अल्मोड़ा)। खेती किसानी की परंपरागत तकनीक को सीखने के लिए सैम हिंगिंग बाटम विवि नैनी प्रयागराज के कृषि स्नातक छात्र छात्राओं का दल यहां मजखाली स्थित राज्य जैविक कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र पहुंच गया है। छात्र छात्राओं को परंपरागत तकनीक, जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस दौरान छात्र छात्राओं के दल को खेतों का भ्रमण कराकर उत्तराखंड की खेती के बारे में भी अध्ययन कराया जाएगा। राज्य जैविक कृषि प्रशिक्षण और अनुसंधान केंद्र मजखाली में समय समय पर बाहरी राज्यों से काश्तकार पहुंचकर खेती किसानी का प्रशिक्षण प्राप्त करने पहुंचते हैं। प्रयागराज से पहुंचे 18 सदस्यीय छात्रों के दल की तीन दिनी कार्यशाला यहां शुरू हो गई है। पहले दिन छात्र छात्राओं को केंद्र के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। केंद्र के प्रभारी डॉ. डीएस नेगी सहित तमाम विशेषज्ञों ने प्रदेश की परंपरागत खेती किसानी के बारे में बताया। जैविक खेती के बारे में भी जानकारी दी गई। डॉ. नेगी ने बताया कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पंचगव्य, अमृतपानी, जीवामृत, वैदिक आदि जैविक खादों के बारे में भी बताया जा रहा है। दल को आस पास के गांवों का भी भ्रमण कराया जाएगा। सुमन महान, मनोहर अधिकारी ने परंपरागत खेती पर अपने व्याख्यान दिए।