द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड को अलग राज्य बने ढाई दशक होने को हैं लेकिन विकास की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 1993 (अविभाजित उत्तर प्रदेश) में स्वीकृत नागार्जुन-डहल-जालली मोटर मार्ग 33 साल बाद भी अधूरा है। साढ़े तेरह किलोमीटर लंबे इस मार्ग के महज दो किलोमीटर हिस्से पर डामरीकरण न होने से क्षेत्र की लगभग 6,000 की आबादी आज भी सुगम यातायात के लिए तरस रही है।
क्षेत्रवासियों की लंबी मांग के बाद 27 जुलाई 2007 को इस मार्ग का कटान शुरू हुआ था। समय-समय पर इसके अलग-अलग हिस्सों में डामरीकरण तो किया गया लेकिन मलस्यारी से जालली तक करीब दो किलोमीटर का हिस्सा आज भी भगवान भरोसे है। इस अधूरे काम की वजह से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) ने भी इसे अपने हाथ में नहीं लिया। स्थानीय लोगों का दर्द यह भी है कि सड़क के लिए कटी भूमि का मुआवजा आज तक काश्तकारों को नहीं मिल सका है।
बरसात में बदतर होते हैं हालात, 6 हजार की आबादी प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार बरसात में इस कच्चे मार्ग पर पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। इससे मनैगैर, मलस्यारी, जालली, चौंनियाँ, बाबन, मयोली, गनोली, पड्यूला, चनोली, बुढोली, डहल और चौंरा बैंगड़ सहित कई गांवों के लोग प्रभावित हैं। रणजीत सिंह नेगी, मनोज रावत, बिशन सिंह रावत और महिपाल किरौला आदि ने लोनिवि से जल्द डामरीकरण की मांग की है।
कोट
अवशेष डेढ़ से दो किमी मोटर मार्ग में डामरीकरण के लिए ₹1,17,00,000 का टेंडर हो चुका है। वर्तमान में अनुबंध गठन की प्रक्रिया चल रही है जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। - ललित अधिकारी, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग, रानीखेत