अल्मोड़ा। उद्यान विभाग शीतलाखेत और गुरुड़ाबांज उद्यान में सेब की उन्नत किस्म स्पर की नर्सरी विकसित करेगा। ताकि काश्तकारों को स्थानीय जलवायु के अनुसार सेब की पौध मिल सके। इससे जिले में सेब उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
जिले के कई क्षेत्र फलोत्पादन के लिए मुफीद हैं, लेकिन अच्छी प्रजाति के पौध नहीं मिल पाने से काश्तकार उद्यानीकरण से विमुख हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में सेब उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं। उद्यान विभाग के पास शीतलाखेत और गुरुड़ाबांज में विभागीय उद्यान हैं। दोनों उद्यानों में सेब के बगीचे हैं। इन उद्यानों में स्पर किस्म के सेब की पौध की नर्सरी स्थापित की जाएगी। विभाग की योजना प्रथम चरण में 10 हजार पौधों की नर्सरी लगाने की है।
मुख्य उद्यान अधिकारी टीएन पांडे ने बताया कि जिले के लिए रेड चीफ, गोल्डन डेविल, रेड फ्यूजी, बांस डेलिसिस, हनी क्राप्स, जेल गाला, सुपर चीफ सेब की प्रजातियां उपयुक्त हैं। इन दोनों स्थानों पर इन प्रजातियों के सेब की स्पर किस्म की नर्सरी विकसित की जाएगी। स्पर किस्म के पेड़ दो से तीन साल में फल देने लगते हैं। इसके अलावा दोनों बगीचों में सेब के पेड़ों में लगे फलों को ओलावृष्टि से बचाने के लिए एनटी हेलनेट (हरी रंग की जाली) से आच्छादित किया जाएगा, ताकि सेब के फलों को ओलावृष्टि से नुकसान नहीं पहुंचे।